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Onion farming : प्याज की खेती कैसे करें

Onion farming in hindi: हजारों वर्षों से प्याज भारतीय खान पान का एक अभिन्न अंग रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक किसी ना किसी रूप में प्याज (onion) हमारी थाली की शोभा बढ़ाता है। व्यंजनों में प्याज का अपना एक विशिष्ट स्थान है। प्याज में कई औषधीय गुण होते हैं। इसे सलाद, सब्जी, अचार और मसाले की तरह भी खाया जाता है। प्याज में गंधक पाया जाता है। इसी वजह से प्याज में गंध और तीखापन होता है। इसके उपयोग से नसों में खून के प्रवाह में बाधा पैदा नहीं होती है।

भारत के साथ साथ विदेशों में भी बड़ी मात्रा में पूरे वर्ष ही इसकी मांग बनी रहती है। भारत के कई प्रांतों में प्याज की खेती (onion ki kheti) किसानों की खुशहाली, समृद्धि  और आय वृद्धि का कारण बनी है। ऐसे में देश के किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर प्याज की खेती (pyaj ki kheti) करके अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। 


तो आइए, The Rural india के इस ब्लॉग में जानें- कम लागत में प्याज की खेती कैसे करें (Onion farming in hindi)


प्याज की खेती के लिए ज़रूरी जलवायु

प्याज की खेती (pyaj ki kheti) समशीतोष्ण प्रदेश में खूब होती है। लेकिन इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में भी लगाया जा सकता है। इसके लिए 50-80 सेंटीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। हल्के गर्म मौसम में इसकी अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। प्याज की फसल 13-24 डिग्री सेल्सियस की तापमान में अच्छी तरह से पनपती है। बीज अंकुरण के  लिए 20-30° सेंटीग्रेड का तापमान बेहतर होता है। फसल वृद्धि के लिए 13-23 सेंटीग्रेड और कन्द बनने की प्रक्रिया के लिए 15-25 °सेंटीग्रेड  अनुकूल होता है। 


प्याज की खेती के लिए उपयोगी मिट्टी

वैसे लगभग भारत के सभी राज्यों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। अच्छी तरह से जल निकासी सुविधाओं के साथ लाल दोमट और काली मिट्टी प्याज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त हैं। जीवांशयुक्त हल्की दोमट मिट्टी में इसकी पैदावार खूब होती है। अधिक अम्लीय और क्षारीय मिट्टी में प्याज की खेती (pyaj ki kheti) करने से बचना चाहिए। प्याज लगाने से पूर्व मिट्टी की जांच करा लेनी चाहिए।  6.5 से 7.5 पीएच मान वाली मिट्टी मे उपयुक्त है |

एक हेक्टेयर खेत में 20 से 25 तक गोबर की खाद रोपाई से एक माह पूर्व ही खेत में मिला देना चाहिए। अच्छे उत्पाद के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किग्रा पोटाश की आवश्यकता पड़ती है। गंधक और जिंक की कमी होने पर ही उपयोग करें।


प्याज की खेती का सही समय

प्याज की खेती (pyaj ki kheti) किसान रबी और खरीफ दोनों मौसम में कर सकते हैं। खरीफ के मौसम में प्याज की खेती के लिए किसान अगस्त-सितंबर के प्रारंभिक सप्ताह में प्याज की रोपाई कर सकते हैं। यदि किसान रबी के मौसम में प्याज की उन्नत खेती करना चाहतें हैं तो उसके लिए जनवरी से फरवरी में प्याज की रोपाई कर सकते हैं। रबी की मौसम में प्याज की खेती करना काफी उत्तम समय होता है। 

खरीफ की फसल तैयार करने के लिए प्याज की नर्सरी 15 जून से 15 जुलाई तक तैयार की जा सकती है तथा इसकी नर्सरी 40 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है तथा 35 से 40 दिनों की प्याज की पौध खेतों में रोपाई या रोपने के लायक हो जाती है। 

यदि किसान रबी की फसल के लिए नर्सरी तैयार करते हैं तो नवंबर दिसंबर महीने में नर्सरी तैयार कर सकते है। रोपाई के लिए 40 से 45 दिनों बाद यानि जनवरी-फरवरी में प्याज की नर्सरी लगाने के लिए तैयार हो जाती है।


प्याज की खेती की तैयारी कैसे करें

प्याज की खेती (pyaj ki kheti) की तैयारी करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप रबी की फसल लेना चाहते हैं या खरीफ की फसल। प्याज की रोपाई करने से पहले खेत की 2-3 बार जुताई करके उसे समतल बना लें। खेत की पहली जुताई के समय ही गोबर या वर्मी कंपोस्ट की खाद मिलाकर पाटा चला लें। 

किसान प्याज की रोपाई दो तरह से कर सकते हैं। 

  1. सूखी रोपाई

  2. गीली रोपाई

सूखी रोपाई में खेत को समतल करने के बाद प्याज की पौधे को 10-15 सेंटीमीटर पर लगाएं। गीली रोपाई धान की रोपाई की तरह पानी वाले खेत में 10-15 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। ध्यान रहें सूखी रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें। पैदावार की दृष्टि से सूखी बुआई ही उपयुक्त होती है। 


प्याज की खेती में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें

  • यदि किसान बीज लगाकर सीधी बुआई करता है तो फसल 120 से 140 दिन में तैयार होती है, जबकि नर्सरी से पौध लगता है तो 60 से 90 दिन में प्याज की फसल पूर्ण रूप से तैयार हो जाती है।

  • नर्सरी के लिए प्याज के बीज 3 से 3.5 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। रोपाई से पूर्व पौधों की जड़ों को कार्बेंडाजिम 9 प्रतिशत के घोल में डूबा देना चाहिए। 

  • प्याज के सफल उत्पादन में भूमि की तैयारी का विशेष महत्व हैं। खेत की प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करना चाहिए। इसके उपरांत 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर या हैरा से करें, प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाएं जिससे नमी सुरक्षित रहें, साथ ही मिट्टी भुरभुरी हो जाए। 

  • भूमि की तैयारी के साथ पौधशाला की भी तैयारी उतनी ही आवश्यक है। पौधशाला की तैयारी में ख़ास ध्यान देकर उसे खरपतवार से मुक्त कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें। 

  • पौधशाला में जल जमाव नहीं हो इसका विशेष ध्यान दें। पौधशाला को छोटी क्यारियों में बांट दें। पौधशाला अपनी आवश्यकता अनुसार बनाएं।


प्याज की उन्नत किस्में

किसी भी सब्जी के वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन में उसके किस्मों का अधिक महत्व है। हमारी मिट्टी के लिए कौन सा अनुशंसित किस्मों हैं इसका ध्यान रखना अधिक आवश्यक है। 

हिसार-2 

इस किस्म की प्याज में तीखापन कम होता है। इसकी भंडारण क्षमता अधिक होती है। फूल और डंठल कम निकलते हैं। फसल 130-145 दिन में पककर तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ लगभग 120 क्विंटल पैदावार होती है।

हिसार प्याज-3

इसमें भी तीखापन कम होता है। भंडारण की क्षमता अधिक होती है। इसकी खासियत यह है कि यह रोग प्रतिरोधि होती है। फसल 130-140 दिन में तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ 125 क्विंटल तक पैदावार होती है।

पूसा रेड

इस किस्म की फसल 125-140 दिन में तैयार होती है। प्रति एकड़ 100-120 क्विंटल पैदावार होती है। 

इनके अलावा प्याज की एरीफाउंड लाइट रेड, एरीफाउंड वाइट, पूसा माधवी, एरीफाउंड डार्क रेड और एन-53 किस्में भी अच्छी मानी जाती हैं।


प्याज की खेती में सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

सिंचाई

प्याज एक ऐसी फसल है जिसमें बिचड़े की रोपनी के बाद यानि जब पौधे स्थिर हो जाते हैं तब इसमें निकौनी एवं सिंचाई की आवश्यकता पड़ती रहती है। इस फसल में अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसकी जड़ें 15-20 सेंटीमीटर सतह पर फैलती है। इसमें 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए। अधिक गहरी सिंचाई न करें। पानी की कमी से खेतों में दरार न बन पाए। आरम्भ में 10-12 दिनों के अंतर पर सिंचाई करें। गर्मी आने पर 5-7 दिनों पर सिंचाई करें।


उर्वरक प्रबंधन

प्याज की बेहतर पैदावार के लिए उर्वरक प्रबंधन की जानकारी होना बेहद जरूरी है। संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों के प्रयोग से प्याज की अच्छी पैदावार होती है। प्याज की खेती के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ खेत में 3-4 टन कम्पोस्ट खाद, 20 किलोग्राम यूरिया, 36 किलोग्राम डीएपी एवं 30 किलोग्राम पोटाश मिला लेनी चाहिए। जब फसल 60-65 दिनों की हो जाए तो 30 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग कर सकते हैं।  

अच्छी गुणवत्ता की प्याज लेने के लिए प्रति एकड़ भूमि में 10 किलोग्राम सल्फर एवं 2 किलोग्राम जिंक का भी प्रयोग करें।


प्याज का भंडारण

ऐसे करें प्याज का भंडारण

  • अधिक अवधि तक प्याज का भंडारण के लिए शीतगृहों का उपयोग करें।
  • यदि आप अपने घरों में ही इसका भंडारण कर रहे हैं। तो प्याज के कंदों को अच्छी तरह सूखाकर प्याज को डंठल सहित भंडारण करें।
  • भंडारण वाला स्थान हवादार होनी चाहिए।
  • प्याज को बंडल बनाकर दीवार या रस्सी के सहारे टांगकर रखने से प्याज लंब अवधि तक सुरक्षित रहती है।  
  • इसे अंकुरण से बचाने के लिए मैलिक हाइड्राजाइड नामक रासायनिक दवा का (1000 से 1500 पी.पी.एम.) छिड़काव कर सकते हैं।


प्याज की खेती में लागत और कमाई

प्याज की खेती (pyaj ki kheti) में अपार संभावनाएं हैं। प्याज की मांग बाजार में सालभर बनी रहती है। मंहगाई की दौरान प्याज ही लोगों को रुलाती है। ऐसे में प्याज के किसानों को अच्छा मुनाफा होता है। 

लागत की बात करें तो प्याज की खेती (onion ki kheti) में 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इस खेती से आप प्रति फसल 1.5 से 2 लाख रूपए आसानी से कमा सकते हैं। 


प्याज की खेती पर एक नज़र 

  • महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान इसके बड़े उत्पादक राज्य हैं।

  • देश में सालाना प्याज उत्पादन औसतन 2.25 से 2.50 करोड़ मीट्रिक टन के बीच है।

  • हर साल कम से कम 1.5 करोड़ मीट्रिक टन प्याज का निर्यात होता है। 


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farmtrac champion 42 hp: फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की कीमत

farmtrac champion 42 hp price: दोस्तों, अगर आप एक लंबे समय तक आसानी से खेत में काम करने वाले ट्रैक्टर को खरीदने के बारे में विचार बना रहे हैं, तो फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर (Farmtrac Champion 42 Tractor) को खरीदना आपके लिए उत्तम हो सकता है। यह ट्रैक्टर बिना किसी परेशानी के लंबे समय तक कृषि संबंधि और उससे जुड़े उपकरण के साथ कार्य कर सकता है।


तो आइए, द रुरल इंडिया के ट्रैक्टर संग्रह (tractor junction) सीरीज़ में फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की कीमत (Farmtrac Champion 42 Tractor Price) और फीचर्स के बारे में विस्तार से जानें।


फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर पर एक नजर

कंपनी ब्रांड

एस्कॉर्ट

मॉडल

फार्मट्रैक चैंपियन 42

सिलेंडर संख्या

3

इंजन हॉर्स पावर

42 HP

गियर

8 फॉरवर्ड + 2 रिवर्स

ब्रेक

तेल में डूबे हुए मल्टी डिस्क ब्रेक

वारंटी

5000 घंटे या 5 साल

farmtrac champion 42 hp price

5.55 लाख से 5.80 लाख* रुपए तक 


फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की इंजन क्षमता

फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर (Farmtrac Champion 42 Tractor) एक  42 hp का लंबे समय तक चलने वाला ट्रैक्टर है, जिसमें 3 सिलेंडर और इंजन रेटेड RPM 2200 दी गई है। इसके अलावा इस ट्रैक्टर में एयर फिल्टर के लिए 3 स्टेज आयल बाथ टाइप के साथ प्री क्लीनर और कूलिंग के लिए वाटर कूलेंट दिए गए है। साथ ही इसमें पीटीओ HP 35.7 है।  


फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर के खास फीचर्स

फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर (Farmtrac Champion 42 Tractor) में सिंगल क्लच और 8  फॉरवर्ड + 2 रिवर्स गियर दिए गए है। इसके अलावा इस ट्रैक्टर में मल्टी डिस्क तेल में डूबे हुए ब्रेक दिए गए है। जानकारी के मुताबिक इस ट्रैक्टर की अधिकतम स्पीड 2.6 से 33.3 किलोमीटर प्रति घंटा है और पीछे की तरफ इसकी अधिकतम स्पीड 3.9 से 14.7 किलोमीटर तक है। फार्मट्रैक कंपनी (Farmtrac Company) आपको यह ट्रैक्टर मैनुअल और पावर स्टीयरिंग दोनों ऑप्शन  के साथ दिया जाता है, जिसे चलाना बेहद आसान होता है। इस ट्रैक्टर  में 50 लीटर की डीजल टैंक की क्षमता और RPM क्षमता 1810 दी गई है, जो इसे बाकी ट्रैक्टरों से अलग बनाती है। फार्मट्रैक 45 स्मार्ट  ट्रैक्टर का कुल वजन 1940 किलोग्राम है और अधिकतम भार उठाने की क्षमता 1800 किलोग्राम तक है। इस ट्रैक्टर में 2WD व्हील ड्राइव दिए गए है।


फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की वारंटी

कंपनी के द्वारा फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर (Farmtrac Champion 42 Tractor) के मॉडलों पर 5000 घंटे और 5  साल तक की वारंटी के साथ आपने हर एक ग्राहकों को देती है।


फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की कीमत (farmtrac champion 42 hp price)

फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर किसान भाइयों के लिए बेहद सस्ते होते हैं। आपको बता दें कि भारतीय बाजार में फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की कीमत (Farmtrac Champion 42 Tractor Price) लगभग 5.55 लाख से 5.80 लाख* रुपए तक है।


किसान भाइयों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न- फार्मट्रैक चैंपियन 42 कितने HP का  ट्रैक्टर है?

उत्तर- फार्मट्रैक चैंपियन 42 एक 42 HP का ट्रैक्टर है।

प्रश्न- फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर में डीजल टैंक की क्षमता क्या है?

उत्तर- फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर में 50 लीटर की डीजल टैंक की क्षमता है।

प्रश्न- फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की कीमत क्या है?

उत्तर - फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर की कीमत 5.55 लाख से 5.80 लाख* रुपए तक है।

प्रश्न- फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर में कितने गियर दिए गए है?

उत्तर- फार्मट्रैक चैंपियन 42 ट्रैक्टर में 8 फॉरवर्ड + 2 रिवर्स गियर दिए गए है।


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farmtrac 60 powermaxx tractor price: फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की कीमत

farmtrac 60 powermaxx tractor price: अगर आप एक किसान है और आप खेती करने के लिए एक मजबूत और अच्छा सस्ता टिकाऊ ट्रैक्टर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो फार्मट्रैक ट्रैक्टर (Farmtrac tractor) एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। फार्मट्रैक 60 पावर मैक्स ट्रैक्टर (Farmtrac 60 Powermaxx Tractor) की भारतीय किसानों के बीच में अपनी एक अलग ही पहचान है। इस कंपनी के ट्रैक्टरों पर किसानों को बेहद ज्यादा भरोसा हैं। फार्मट्रेक 60 पावरमैक्स (Farmtrac 60 Powermax) एक नई तकनीक से बना ट्रैक्टर है। यह खेतों में असाधारण प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। अगर हम बात करें इसके डिजाइन की तो दिखने में यह बेहद सुंदर है।


तो आइए, द रूरल इंडिया के ट्रैक्टर संग्रह (tractor junction) सीरीज़ में फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की कीमत (Farmtrac 60 Powermax Tractor Price) और फीचर्स के बारे में विस्तार से जानें।


फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर (farmtrac 60 powermax tractor) पर एक नजर

कंपनी ब्रांड

एस्कॉर्ट

मॉडल

फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स

सिलेंडर संख्या

3

इंजन हॉर्स पावर

55 HP

गियर

16 फॉरवर्ड + 4 रिवर्स

ब्रेक

तेल में डूबे हुए ब्रेक्स

वारंटी

5000 घंटे या 5 साल

farmtrac 60 powermax tractor price

7.20 लाख से 7.55 लाख* रुपए तक 


फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की इंजन क्षमता

फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स (Farmtrac 60 Powermax ) एक 55 HP का शक्तिशाली ट्रैक्टर है,  जिसमें 3 सिलेंडर और इंजन रेटेड RPM 2000 दी गई है। साथ ही इसमें PTO HP 49 है।


फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर के खास फीचर्स

फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स(Farmtrac 60 Powermax ) में सिंगल ड्यूल/ इंडिपैंडेंट क्लच और  16 फॉरवर्ड + 4 रिवर्स गियर दिए गए है। यह  ट्रैक्टर तेल में डूबे हुए ब्रेक्स के साथ आता है, इसे एक मजबूत पकड़ में मदद करते है। साथ ही इस ट्रैक्टर की आगे की तरफ अधिकतम स्पीड 2.4 से 34.8 किलोमीटर प्रति घंटा और पीछे की तरफ अधिकतम स्पीड 3.5 से 15.8  किलोमीटर प्रति घंटा है। एस्कॉर्ट का यह ट्रैक्टर शानदार पावर स्टीयरिंग और 60 लीटर के डीजल टैंक की क्षमता के साथ आता है।


आपको बता दें कि फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर का कुल वजन (Farmtrac 60 Powermax Tractor Total Weight)  2280 किलोग्राम है और वजन उठाने की अधिकतम क्षमता 2500 किलोग्राम तक है।


फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की वारंटी

फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर (Farmtrac 60 Powermax Tractor) के  मॉडलों पर कंपनी  5000 घंटे और 5  साल तक की वारंटी के साथ देती है। यह वारंटी कंपनी अपने हर एक ग्राहकों को देती है।


फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की कीमत (farmtrac 60 powermax tractor price)

फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की कीमत (Farmtrac 60 Powermax Tractor Price) भारतीय बाजार में किसानों के बजट के अनुसार है। यह कंपनी अपने ट्रैक्टरों का निर्माण किसानों को ध्यान में रखते हुए तैयार करती है। इसलिए फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की कीमत (Farmtrac 60 Powermax Tractor Price) लगभग 7.20 लाख से शुरू होकर 7.55 लाख* रुपए तक है।


किसान भाइयों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स कितने HP का ट्रैक्टर है?

उत्तर- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स एक 55 HP का ट्रैक्टर है।

प्रश्न- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्सट्रैक्टर में डीजल टैंक की क्षमता क्या है?

उत्तर- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर में 60 लीटर की डीजल टैंक की क्षमता है।

प्रश्न- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्सट्रैक्टर की कीमत क्या है?

उत्तर- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्स ट्रैक्टर की कीमत 7.20 लाख से 7.55 लाख* रुपए तक है।

प्रश्न- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्सट्रैक्टर में कितने गियर दिए गए है?

उत्तर- फार्मट्रैक 60 पावरमैक्सट्रैक्टर में 16 फॉरवर्ड + 4 रिवर्स गियर दिए गए है।


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कीवी की खेती

कीवी की खेती कैसे करें? kiwi ki kheti kaise karen: कोरोना महामारी के इस दौर में एक शब्द ने हम सब की ज़िदगी में एक खास जगह बना ली है। 

यह शब्द है “इम्यूनिटी”. 


इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हम सभी अपने खान-पान में ऐसी चीज़ो को शामिल कर रहे हैं, जो हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करें। ऐसे में एक फल है, जिसका नाम है- कीवी (kiwi)

कीवी(kiwi fruit) देखने में भूरा और काटने पर सफेद और हरा होता है। यह एक औषधीय फल है। इसमें इम्यूनिटी बढ़ाने की क्षमता अधिक होती है। इसे खाने के हमारे शरीर में प्लेट्लेट्स की संख्या बढ़ती है। इसमें काफी मात्रा में विटामिन सी, विटामिन ई, कॉपर, सेडियम, पोटैशियम, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है।


कीवी इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत करने के साथ ही कई और बीमारियों में भी फायदेमंद होता है। प्रसव के बाद महिलाओं में शक्ति बढ़ाने के लिए भी कीवी का इस्तेमाल किया जाता है। 

यही कारण है कि डॉक्टर भी प्रतिदिन एक कीवी खाने की सलाह देते हैं। अगर आपने अभी तक अपनी डाइट में मीठे-तीखे स्वाद वाली कीवी को शामिल नहीं किया है, तो जल्द कर लें। 


सेहत के लिए इतना लाभकारी होने की वजह से भारत में भी इस फल की मांग बढ़ गई है। ऐसे में कीवी की खेती (kiwi ki kheti) करना फायदे का सौदा हो सकता है। इसकी खेती से किसान प्रति एकड़ 5-8 लाख रुपए तक आसानी से कमा सकते हैं। 


तो आइए, इस ब्लॉग में कीवी की खेती (kiwi ki kheti in hindi) को विस्तार से जानें।


सबसे पहले कीवी की खेती के लिए जरूरी जलवायु को जान लेते हैं। 


कीवी की खेती के लिए जरूरी जलवायु

कीवी (kiwi) एक विदेशी फल है। इसका मूल उत्पादक चीन है। पूरे विश्व में सबसे ज्यादा मात्रा में कीवी की खेती चीन में ही होती है। चीनी फल होने की वजह से ही इसे चाइनीज़ गूज़बेरी भी कहा जाता है। 

कीवी की खेती (Kiwi ki kheti)

भारत में प्रमुख रूप से इसकी खेती जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश राज्यों में की जाती है।


कीवी (kiwi) ठंडी जलवायु का पौधा है। इसकी खेती ज्यादतर ठंडे स्थानों पर की जाती है। जहां पर सर्दियों के मौसम में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है। वहीं गर्मियों में भी 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं हो। ज्यादा गर्म स्थान कीवी की खेती के लिए सही नहीं माना जाता है। 


कीवी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

कीवी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। जिसका पीएच मान 5 से 6 के बीच में हो। कीवी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली भूमि होनी चाहिए। जैविक और कार्बनिक खाद युक्त मिट्टी कीवी की खेती के लिए काफी लाभदायक होता है। 


कीवी की खेती के लिए सही समय

जैसे कि हम पहले भी बात कर चुके हैं कि कीवी की खेती (kiwi ki kheti) ज्यादातर ठंडी जगहों पर की जाती है। इस हिसाब से देखा जाए तो किवी की खेती करने का सबसे सही समय जनवरी माह है। इस समय लगभग सभी प्रदेशों में ठंड रहती है।


कीवी के पौधे में फूल मार्च से अप्रैल के माह तक आते हैं, वहीं जून से जुलाई माह के बीच फल बनता है। इसके बाद अक्टूबर से दिसम्बर के बीच फल पक जाते हैं। 


कीवी के लिए खेत की तैयारी 

कीवी की खेती के लिए कुछ खास बातों का ख्याल रखा जाना बेहद जरूरी होता है। कीवी की खेती के लिए तैयारी 2 महीने पहले से कर लेनी चाहिए।


कीवी की खेती में ध्यान रखने योग्य बातें 

  • कीवी की खेती के दौरान एक हेक्टेयर जमीन पर करीब 400 पौधे लगाने चाहिए। 

  • कीवी की खेती के लिए भूमि की अच्छे से जुताई करने के बाद निश्चित दूरी पर गड्ढे खोदना चाहिए। 

  • गड्ढों के बीच में दूरी करीब 6 मीटर की रखें।


ध्यान रखें- कीवी की खेती में पौधे से पौधे के बीच की दूरी करीब 6 मीटर होती है जबकि पंक्तियों के बीच की दूरी 4 मीटर होती है।

  • खोदे गए गड्ढों को कुछ समय के लिए छोड़ दें।

  • जब गड्ढों में अच्छी तरह से हवा और धूप लग जाए तो गड्ढों में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट को गड्ढे में भर कर ढक दें। 

  • इसके बाद गड्ढों की सिंचाई करके कुछ समय के लिए छोड़ दें। 

  • कीवी के पौधों की पंक्ति को उत्तर से दक्षिण दिशा में लगाना चाहिए, जिससे कि पौधों पर धूप सीधे न पड़े।

  • कीवी में नर और मादा दोनों पौधे होते हैं। इसलिए ध्यान रखें कि 10 कीवी के पौधों में से 9 मादा पौधों के लिए 1 नर पौधे को अवश्य लगाएं।

 

कीवी की पौध तैयार करने की विधियां

कीवी की पौध 3 विधियों से तैयार की जाती है।


  • बडिंग विधि

  • ग्राफ्टिंग

  • लेयरिंग विधि


कीवी की उन्नत किस्में

भारत में मुख्य रूप से कीवी की हेवर्ड, एलीसन, टुमयूरी, एबॉट, मोंटी, ब्रूनो नाम की प्रजातियां उगाई जाती हैं। इनमें से सबसे ज्यादा मांग हेवर्ड की होती है। 


सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

कीवी के पौधों को गर्मियों में पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है, इस दौरान हर 10 से 15 दिन के अंतर पर सिचाई की जानी चाहिए। वहीं सर्दियों में भी जरूरत के हिसाब से सिचाई करनी चाहिए। कीवी को करीब 150 सेंटीमीटर की औसत बारिश वाले क्षेत्र में लगाया जाना चाहिए। 


कीवी के उर्वरक प्रबंधन की बात करें तो इसकी खेती के लिए जैविक और रासायनिक दोनों ही तरह की खाद की आवश्यकता होती है। पौधे को लगाते वक्त करीब 15 किलो गोबर की सधी हुई खाद और 50 ग्राम NPK को गड्ढे में भर देना चाहिए। 

ध्यान रखें- कीवी के पौधे की कलम लगाते समय बालू, सड़ी खाद, मिट्टी, लकड़ी का बुरादा और कोयले का चूरा 2:2:1:1 के अनुपात में सही रहता है। 
  

कीवी की खेती में लागत और कमाई

एक एकड़ कीवी की फसल में 3-4 लाख की लागत आती है। कीवी की खेती से कमाई, खर्च निकालकर 10-12 लाख का मुनाफा हो जाता है। औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग बाजार में बहुत ज्यादा है।


यह बहुत जल्दी बिक जाने वाला फल होता है क्यों की इसकी मांग अधिक है व पूर्ति कम है। यह तीन सौ रुपए किलो से लेकर पांच सौ रुपए किलो तक बिक जाती है।


कीवी की पैकिंग और ब्रांडिंग भी मुनाफे को बढ़ा सकती है। पैकिंग करके आप इसे बड़े महानगरों में बिक्री के लिए भेज सकते हैं। 

 

ये तो थी कीवी की खेती (kiwi ki kheti) की बात। लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए शेयर कर सकते हैं। 


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