पोषक तत्वों का वर्गीकरण, पौधों के विकास के लिए भी आवश्यक पोषक तत्वों(nutrients) की जरूरत होती है। NPK- The Rural India
पोषक तत्वों के वर्गीकरण

पोषक तत्वों के वर्गीकरण (Nutrient classification in hindi): किसान साथियों, जिस तरह से हमारे जीवन में विटामिन, खनिज-लवण और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है। उसी तरह हमारे पौधों के विकास के लिए भी उन्हें आवश्यक पोषक तत्वों (nutrients) की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों के बिना हमारी फसल खराब हो जाता है या वांछित उपज नहीं मिल पाता है। इन पोषक तत्वों के अभाव में पौधों की वृद्धि रूक जाती है।

पौधे जड़ों द्वारा भूमि से पानी और पोषक तत्व, वायु से कार्बनडाई ऑक्साइड और सूर्य से प्रकाश ऊर्जा लेकर अपने लिए भोजन का निर्माण करते है। कृषि वैज्ञानिकों ने परीक्षणों के आधार पर पौधों के लिए जरूरी कुल 17 पोषक तत्वों को जरूरी बताया है। जिनके बिना पौधों का विकास और प्रजनन आदि क्रियाएं सम्भव नहीं हैं।

तो आइए, The Rural India के इस ब्लॉग में पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों (Nutrient classification in hindi) के बारे में जानते हैं।

इन पोषक तत्वों (nutrients) को 3 वर्गों में बांटा गया है।

  1. मुख्य पोषक तत्व- नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश।
  2. गौण(माध्यमिक) पोषक तत्व- कैल्सियम, मैग्नीशियम एवं गंधक।
  3. सूक्ष्म पोषक तत्व- लोहा, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, बोरान एवं क्लोरीन।

मुख्य पोषक तत्व

नाइट्रोजन

नाइट्रोजन पौधों के बढ़वार(विकास) के लिए बेहद जरूरी होती है। यह पत्तों के आकार बढ़ाने में सहायक होता है। पौधों की कोशिकाओं में रस के निर्माण में अति आवश्यक होता है। पौधों में पूरा विकास और पत्तों को हरा करने में सहायता करता है। फसल के दानों को बढ़ाता है। यह पौधो में प्रोटीन को बढ़ाता है। नाइट्रोजन के उचित मात्रा में देने पर खेत में लगे फसल लहलहाने लगती है। जिसे देख किसान खुश होता है। 

फास्फोरस

बीजों के अंकुरण में आवश्यक जड़ों के विकास में फास्फोरस की अहम भूमिका होती है। फोस्फोरस की महत्ता को निम्नलिखित बिन्दुओं से भी समझ सकते हैं।

·      यह फूलों और फलों की वृद्धि में सहायक होती है।

·      फास्फोरस नाइट्रोजन की अधिकता से होने वाले नुकसान को भी बचाती है।

·      पौधों में एक समान वृद्धि करना।

·      प्रकाश सश्लेषण की क्रिया को तेज़ करना।

·      पौधों में प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना।

·      बीजों का वजन बढ़ाना और स्वस्थ बीज का बनाना।

 पोटैशियम

पौधे द्वारा पत्तो में बनाए गए कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को फलों में भेजता है। ताकि फलों का उचित विकास हो। पोटैशियम यानि पोटाश के फसलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

·      पौधो में रंग की गुणवत्ता और स्वाद बढ़ाने का काम करता है।

·      पौधों को जल्दी गिरने से रोकता है और उसमे लगने वाले रोगों से लड़ता है।

·      अनाज के दानों में चमक बढ़ाता है।

·      पौधों को जल्दी सूखने से रोकता है।

माध्यमिक तत्व

कैल्सियम

दलहन फसलों में प्रोटीन को बढ़ाता है। आलू मूंगफली और तम्बाकू जैसी फसलो के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। यह पौधों में कार्बोहाइड्रेट के विकास में भी सहायक होती है।

मैग्नेशियम

पौधों का सूर्य से भोजन बनाने की क्रिया में महत्वपूर्ण काम करता है। फसल के पत्तों में हरित द्रव(क्लोरोफिल) के निर्माण में सहायता करता है। पोधो में प्रोटीन वसा कार्बोहाईट के निर्माण करता है। चारे वाली फसलो में मैग्नेशियम का अधिक लाभ है।

सल्फर-गंधक

सल्फर पौधों में प्रोटीन को बढ़ाने का कार्य करता है। पौधों की जड़ों का विकास करती है। और फसल की उत्पादन क्षमता बढ़ाता है। यह सरसों प्याज़ और लहसुन की फसल में आवश्यक होता है। यह प्रोटीन वसा अम्ल विटामिन्स का निर्माण में सहायक होता है।

सूक्ष्म पोषक तत्व

जिंक-जस्ता

पौधो में उत्पादन क्षमता बढ़ाती है। पानी की अधिकता को रोकता है और ज्यादा पानी से होने वाले नुकसान को बचाता है।  

·      पौधों की बढ़वार(विकास) में सहायक।

·      केरोटिन प्रोटीन हार्मोन्स सश्लेषण में सहायक होता है।

·      क्लोरोफ़िल को बनाने में सहायता करता है।

बोरान

·      फुल और फलों के निर्माण में सहायक।

·      पौधो में कैल्शियम के निर्माण में सहायता करता है।

·      प्रजनन कार्य और परागन में सहायक होता है।

·      यह कैल्सियम और पोटैशियम के अनुपात को नियंत्रित करता है।

·      दलहन वाली फसलो में जड़ ग्रन्थि के विकास में सहायता करता है।

लोहा(आयरन)

पौधे के पत्तो में प्रकाश सश्लेषण की क्रिया में हरितद्रव्य(क्लोरोफिल) बनाने में सहायता करता है।

क्लोरोफिल और प्रोटीन का निर्माण में सहायता करता है। यह पौधों की श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन का परिवहन करता है।

मैंगनीज

पौधों में प्रकाश संश्लेषण की आक्सीकरण और उपचयन क्रिया में सहायक होता है। एन्जाईम बढ़ाने में मदद करता है।

तांबा(कापर)

पौधे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। पौधो में प्रोटीन और विटामिन ए को बनाता है। कवक रोगों को नियंत्रित करता है।

मॉलिब्डेनम

पौधे में जो नाइट्रोजन होता है उसे प्रोटीन में बदलता है। पौधो में विटामिन सी (C) और शर्करा के संश्लेषण में सहायक होता है। आपको बता दें, नींबू वर्गीय पौधों में मॉलिब्डेनम की कमी से पत्तियों में पीला धब्बा रोग लगता है।

संक्षेप में कहें तो टिकाऊ फसल उत्पादन के लिए किसानों को अपने खेत की मिट्टी को उर्वरा शक्ति और पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों (nutrients) की जानकारी बेहद आवश्यक है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न- फसल के पोषक तत्व क्या है?

उत्तर- फसल के मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्सियम, मैग्नीशियम, गन्धक, लोहा, जिंक, कॉपर, मैग्नीज, मोलिब्डेनम, बोरान और क्लोरीन हैं।

प्रश्न- पोषक तत्व क्या हैं पोषक तत्वों का क्या महत्व है?

उत्तर- पोषक तत्व जीव के विकास में काफी योगदान करते हैं। बिना पोषक तत्व के जीवनों का विकास रूक जाता है। इसके साथ ही कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। 

प्रश्न-पौधों में वृहद एवं सूक्ष्म पोषकों की क्या भूमिका है?

उत्तर- पौधों को स्वस्थ और विकसित करने के लिए सूक्ष्म पोषकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 

प्रश्न- पोषक तत्व क्या है पांच प्रमुख पोषक तत्व लिखिए?

उत्तर- जीवों को पोषण प्रदान करने वाले पदार्थों को पोषक तत्व कहते हैं।  

ये तो थी, पोषक तत्वों के वर्गीकरण(Nutrient classification) की बात। लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इस लेख को शेयर करें।

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