बत्तख पालन कैसे करें

Duck farming in hindi: डक फार्मिंग यानी बत्तख पालन (batak palan) एक आकर्षक कृषि व्यवसाय है। बत्तख के अंडे और मांस से किसानों को खूब आमदनी होती है। पोल्ट्री व्यवसाय में मुर्गी के बाद बत्तख पालन (Duck Farming) सबसे अधिक किया जाता है। इसमें मुर्गी पालन से भी ज़्यादा  मुनाफा है।

आज के इस लेख के ज़रिए हम आपको बताएंगे कि कैसे आप बत्तख पालकर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं?

तो आइए, द रूरल इंडिया के इस लेख में बत्तख पालन का तरीका (batak palan ka tarika) विस्तार से जानें।


यहां आप जानेंगे-

  • बत्तख पालन के फायदे

  • बत्तख पालन के लिए आवश्यक जलवायु

  • आवास की जानकारी 

  • आहार प्रबंधन

  • उन्नत नस्लें

  • कैसे करें बत्तख पालन की शुरुआत

  • लागत और कमाई

बत्तख पालन के फायदे

  • बत्तख के खान-पान पर कम खर्च करना पड़ता है

  • उन्नत नस्लें 300 से अधिक अंडे एक साल में देते हैं

  • बत्तख की अंडे देने की अवधि ज़्यादा  होती है

  • मुर्गियों की तुलना में खान-पान पर कम खर्च करना पड़ता है

  • मुर्गियों की अपेक्षा बत्तखों में कम बीमारियां होती हैं

  • पानी और ज़मीन दोनों जगहों पर बत्तख पालन संभव है


बत्तख पालन के लिए ज़रूरी जलवायु

बत्तख एक जलीय पक्षी है, जो गांव के तालाबों, धान और मक्के के खेतों में आसानी से पाला जा सकता है। इसके लिए नम जलवायु की आवश्यकता होती है, जहां साल भर पानी की उचित व्यवस्था हो। इसके लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस  का तापमान अनुकूल होता है। 


बत्तख के लिए आवास प्रबंधन 

  1. शेड बनाने के लिए ऊंचे स्थान का चयन करें

  2. शेड में हल्की धूप और हवा की उचित व्यवस्था हो

  3. शेड के आसपास तालाब या धान की खेत उपलब्ध हो

  4. शेड के पास अधिक पेड़-पौधे नहीं होने चाहिए

  5. रेलवे लाइन या कोलाहल से दूर आवास बनाएं 

  6. शेड की फर्श सूखी होनी चाहिए

  7. शेड पूर्व और पश्चिम में लंबा और उत्तर दक्षिण दिशा में चौड़ा होना चाहिए

  8. एक शेड से दूसरी शेड के बीच की दूरी 20 फीट से कम नहीं होनी चाहिए 


आहार प्रबंधन

बत्तखें कुछ भी खा लेती हैं, बशर्ते खाना गीला हो। सूखा खाना इनके गले में फंस जाता है। रसोई का कचरा, जूठन, चावल, मक्का, चोकर, घोंघे, मछली का आहार ये बड़े चाव से खाते हैं। नदियों में छोटे-मोटे कीड़े मकोड़े खाकर ये आसानी से अपना पेट भर लेती हैं। इसलिए, इनके आहार पर कुछ खास खर्च नहीं करना पड़ता।


बत्तखों का उचित विकास हो, इसके लिए इन्हें तीन स्टेप्स में आहार प्रबंधन किया जा सकता है। 

  1. स्टार्टर राशन- ये राशन चूजों को दिया जाता है

  2. ग्रोअर राशन- ये राशन 15-20 दिन के बाद चूजों को दिया जाता है

  3. फिनिशर राशन- ये राशन 2-3 महीने के बाद बड़े चूजों को दिया जाता है


बत्तख की उन्नत नस्लें

बत्तख की प्रमुख 3 नस्लें हैं-


  1. मांस उत्पादन के लिए- सफेद पैकिंग, एलिसबरी, मस्कोवी, राउन, आरफींगटन, स्वीडन, पैकिंग

  2. अंडा उत्पादन के लिए- इंडियन रनर

  3. दोनों के लिए- खाकी कैंपबेल


ऐसे करें बत्तख पालन (batak palan) की शुरुआत

  • बत्तख पालन शुरू करने के लिए शांत जगह बेहतर होती है। तालाब या पोखरों के नज़दीक बत्तख पालन बहुत अच्छा होता है। इसके दो फायदे होते हैं। 


पहला- बत्तखों को तैरने के लिए जगह मिल जाती है 

दूसरा- आहार के लिए कीड़े-मकोड़े और घोंघे की व्यवस्था हो जाती है


  • यदि शेड के आसपास तालाब या पानी की व्यवस्था नहीं है, तो तालाब या नालियों की खुदाई ज़रूर करा लें। पानी की व्यवस्था होने से बत्तखों की प्रजनन क्षमता बढ़ जाती है। 


  • यदि तालाब की खुदाई नहीं करवाना चाहते हैं तो टीनशेड के चारों तरफ 2-3 फुट गहरी व चौड़ी नाली बनवा लें, जिसमें बतखें आसानी से तैर सकें।


  • चूजों का चुनाव करते समय यह ज़रूर ध्यान रखें कि आपका बत्तख पालन करने का उद्देश्य क्या है?इसके लिए उन्नत नस्ल के स्वस्थ चूजों का ही चुनाव करें, जिसका भार 35-40 ग्राम से कम न हों। 



बत्तख पालन (batak palan) में लागत और कमाई

एक साल में एक बत्तख 280 से 300 अंडे देती है, जो मुर्गियों के मुकाबले दोगुनी है। इसके एक अंडे की कीमत बाज़ार में 6 से 8 रुपये मिल जाती है।  इसके मांस की मांग भी बहुत अधिक है।


लागत की बात करें तो बत्तख पालन व्यवसाय (duck farming business) में बहुत ही कम पूंजी खर्च होती है। 1,000 चूजों पर साल भर में 1-1.5 लाख रुपये की लागत आती है। इससे पशुपालकों को प्रतिवर्ष 3-4 लाख रुपये की कमाई हो जाती है।


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