सरपंच को हटाने का नियम, ग्राम पंचायत के कार्य, सरपंच के कार्य, सरपंच के अधिकार, सरपंच का चुनाव कैसे होता है? इस ब्लॉग में जानें- The Rural India
Sarpanch : सरपंच का चुनाव, सरपंच के कार्य और सरपंच की सैलरी, यहां जानिए

सरपंच का चुनाव, सरपंच के कार्य की लिस्ट और सरपंच की सैलरी: जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारे देश में 1992 से पंचायती राज अधिनियम (Panchayati Raj Act-1992) लागू है। इसे स्थानीय स्वशासन भी कहा जाता है। इस स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को 3 स्तर विभाजित किया है। 

  1. ग्राम पंचायत (Gram panchayat) 

  2. क्षेत्र पंचायत (Kshetra panchayat)

  3. जिला पंचायत  (Jila panchayat)


इन संस्थाओं में ग्राम पंचायत (Gram panchayat) सबसे महत्वपूर्ण है। इसके मुखिया को हमलोग ग्राम प्रधान (Gram pradhan) या सरपंच (Sarpanch) के नाम से जानते हैं। सरपंच को ग्राम पंचायत का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है। गांव के विकास की जिम्मेदारी इन्हीं सरंपचों के कंधों पर होती है।


स्थानीय स्तर पर हर 5वें साल सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav) होता है। सरपंच (sarpanch) गांव का प्रथम नागरिक होता है।


अब आपके मन में यह प्रश्न होगा कि सरपंच का चुनाव कैसे होता है? तो आपको बता दें, सरपंच का चुनाव सीधे गांव के मतदातों द्वारा होता है। पंचायती राज अधिनियम-1992 में भी गांव के सरपंच को कई अधिकार दिए गए हैं। गांव में सरपंच (Sarpach) पद का एक विशेष महत्व है।


तो आइए, ‘द रुरल इंडिया’ के इस लेख में सरपंच का चुनाव से लेकर, सरपंच की सैलरी और सरपंच के कार्य की लिस्ट और अधिकार के बारे में करीब से जानेंगे। 


सरपंच (sarpanch) को जानने से पहले पंचायती राज अधिनियम-1992 के बारे में जान लेते हैं। 


पंचायती राज अधिनियम-1992 (Panchayati Raj Act-1992)

गौरतलब है कि भारत में 1992 के पहले स्थानीय शासन को कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं था। 73वें संविधान संशोधन द्वारा स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ है। इस अधिनियम को पंचायती राज अधिनियम-1992 के नाम से जाना जाता है। जो 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में लागू है। 


सरपंच के कार्य और अधिकार pdf


पंचायती राज अधिनियम-1992 की महत्वपूर्ण बातें

  • त्रिस्तरीय पंचायत की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद)

  • हर 5 वर्ष में पंचायतों में नियमित चुनाव

  • SC/ST और OBC के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण

  • महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों का आरक्षण(जो अब 50%तक है)

  • पंचायतों की वित्तीय सुधार के लिए राज्य वित्त आयोगों का गठन

  • राज्य चुनाव आयोग का गठन

  • 11वीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों पर आर्थिक और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना और उनका निष्पादन करना


सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav)

पंचायती राज व्यवस्था में सरपंच का चुनाव प्रत्येक 5 साल के बाद होता है। चुनाव की जिम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की होती है। राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनाव को  संपादित करती है। ग्राम पंचायत की वोटर लिस्ट में शामिल मतदातों के द्वारा सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष रूप (voting) से किया जाता है। सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार को सरपंच (sarpanch) चुन लिया जाता है। 


सरपंच का चुनाव कैसे होता है ? (sarpanch ka chunav kaise hota hai)

  • सरपंच चुनाव से पहले चुनाव आयोग गांव की जनसंख्या के अनुपात और रोस्टर व्यवस्था के आधार पर SC/ST/OBC के लिए सीट निर्धारित करती है।

  • सरपंच वही बन सकता है, जिस वर्ग के लिए सरपंच का सीट आरक्षित किया गया है।

  • जैसे- महिला सीट निर्धारित है, तो वहां महिला ही सरपंच बन सकती हैं। इसी प्रकार SC/ST/OBC के लिए निर्धारित सीट पर उसी वर्ग की महिला या पुरूष चुनाव के लिए उम्मीदवार हो सकते हैं। 


सरपंच पद के लिए जरूरी योग्यताएं

  • सरपंच बनने के लिए उम्मीद्वार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

  • उम्मीदवार का नाम उस ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में हो। 

  • राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून के अधीन पंचायत का सदस्य निर्वाचित होने के योग्य हो।  

  • सरकारी कर्मचारी सरपंच का चुनाव नहीं लड़ सकता है।   

  • सरपंच बनने के लिए कई राज्यों में 8वीं पास या साक्षर होना जरुरी है। लेकिन यह बाध्यता सभी राज्यों में नहीं है।


सरपंच चुनाव के लिए आवश्यक दस्तावेज

सरपंच के लिए आवश्यक दस्तावेज

सरपंच के अधिकार (sarpanch ke adhikar)

  • सरपंच को ग्रामसभा तथा ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने का पूरा अधिकार है।

  • सरपंच ही ग्राम पंचायत की बैठकों का अध्यक्षता करता है।

  • ग्राम पंचायत की कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां सरपंच को प्राप्त है।

  • ग्राम पंचायत के अधीन कार्यरत कर्मचारियों के कार्यों की निगरानी और देखरेख का अधिकार है।

  • सच्चे अर्थों में गांव का नेतृत्व सरपंच ही करता है।


सरपंच के कार्य की लिस्ट

  • गांव के विकास कार्यों की जिम्मेदारी

  • ग्राम सभा की बैठकों में लोगों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना

  • खासकर SC/ST, पिछड़े वर्गों और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना

  • गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखना

  • आपसी विवादों का निपटारा करना


सरपंच के कार्य (sarpanch ke karya)

सरपंच गांव का मुखिया होता है। सरपंच के कार्य की लिस्ट में गांव के विकास के लिए कई कार्य करने होते हैं।

जैसे-

  • गावं में सभी तरह के विकास कार्य कराना

  • सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कराना

  • सार्वजनिक वितरण व्यवस्था (PDS) की निगरानी करना

  • मनरेगा जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन कराना

  • गांव में सड़कों का रखरखाव करना

  • पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना

  • प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देना

  • खेल का मैदान व खेल को बढ़ावा देना

  • स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना

  • सिंचाई के साधन की व्यवस्था करना

  • दाह संस्कार व कब्रिस्तान का रखरखाव करना

  • गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करना

  • आंगनबाड़ी केंद्र को सुचारु रूप से चलाने में मदद करना


सरपंच की सैलरी (sarpanch ki salary) 

अधिकांश ग्रामवासियों का प्रश्न होता है, सरपंच की सैलरी कितनी होती है (sarpanch ki salary kitni hoti hai)? तो आपको बता दें, सरपंच की सैलरी (sarpanch ki salary) राज्य सरकार के नियमों के मुताबिक होता है। राज्य अपने अनुसार इसका निर्धारण करते हैं। कुछ राज्यों में इसका प्रावधान नहीं है। जैसे- उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान को प्रतिमाह 5000 रुपए तो हरियाणा में सरपंच को प्रतिमाह 3000 रुपये मानदेय मिलता है। अन्य राज्यों में सरपंच की सैलरी इससे अधिक भी हो सकती है।


अब तक आपने सरपंच चुनने की प्रक्रिया, सरपंच के कार्य की लिस्ट और सरपंच की सैलरी के बारे में जाना। 


लेकिन जब सरपंच अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करें, तो गांव के लोग क्या करें? यह अधिकांश ग्रामवासियों का सवाल होता है।


तो आपको बता दें, इसके लिए पंचायती राज अधिनियम में सरपंच को हटाने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। 


सरपंच को हटाने की प्रक्रिया

यदि सरपंच अपने दायित्वों को सही से निर्वहन नही कर रहा है, तो ग्रामसभा  को एक आवश्यक प्रक्रिया के तहत सरपंच को हटाने का अधिकार है। लेकिन सरपंच को हटाने की प्रक्रिया सरल भी है और कठिन भी। 


आप कहेंगे कि कठिन क्यूं? तो आपको बता दें, आप सरपंच को 2 सालों के अंदर नहीं हटा सकते हैं। जब सरपंच के चुनाव के 6 महीने शेष बचें हो तब भी सरपंच को हटाने की प्रक्रिया नहीं की जा सकती है। इसके लिए पंचायती राज अधिनियम में प्रावधान बनाए गए हैं। 


अब आप कहेंगे कि सरल क्यूं है? तो आपको बता दें, सभी ग्रामवासी और ग्राम पंचायत के सदस्य 2 साल बाद उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर ⅔ बहुमत मिलने पर सरपंच को आसानी से हटा सकते हैं। 


इसके लिए सबसे पहले आपको लिखित शिकायत जिला पंचायत राज अधिकारी या संबंधित अधिकारी से करनी पड़ेगी।लिखित शिकायत में  ग्राम पंचायत के आधे सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए। सूचना में पदमुक्त करने के सभी कारणों का उल्लेख हो। 


हस्ताक्षर करने वाले ग्राम पंचायत सदस्यों में से तीन सदस्यों का जिला पंचायती राज अधिकारी के सामने उपस्थित होना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट सही पाए जाने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (District Panchayat Raj Officer) गांव में एक बैठक बुलाता है जिसकी सूचना कम से कम 15 दिन पहले सरपंच और ग्रामवासियों को दी जाती है। 


अविश्वास प्रस्ताव पर ग्रामसभा के सदस्य, वार्ड पंच और सरपंच को बहस का मौका दिया जाता है। सभी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते हैं। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराई जाती है।


यदि अविश्वास-प्रस्ताव पर सदस्यों के 2/3 से ज्यादा बहुमत मिलने पर प्रधान को पद से हटा दिया जाता है।      


अब तो आप समझ ही गए होंगे कि सरपंच का पद कितना महत्वपूर्ण है। गांव की विकास में सरपंच (Sarpanch) की इतनी बड़ी भूमिका है तो आपकी भी कम नहीं है, क्योंकि आप ही गांव के सरपंच को चुनते हैं। जब भी आप गांव के सरपंच को चुनें तो योग्य चुनें। 


यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो, तो इसे अपने ग्रामवासियों तक जरूर पहुंचाए। इससे उन्हें भी सरपंच पद की पूरी जानकारी मिल सके।

 

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