ग्राम पंचायत (grampanchayt): पंचायत सहायक के कार्य

हमारे देश में ग्राम पंचायत (grampanchayt) लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। ग्राम पंचायत का गठन मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से की जाती है। इन ग्राम पंचायतों के मुखिया को सरपंच या ग्राम प्रधान कहा जाता है। लेकिन ग्राम पंचायत (grampanchayt) को चलाने के लिए सरपंच, ग्राम प्रधान, वार्ड पंच के अलावा सरकारी प्रतिनिधि भी होते हैं। जो ग्राम पंचायतों के कार्यों में मदद करते हैं। इन्हें पंचायत सहायक (panchayat sahayak) या पंचायत सचिव के नाम से भी जाना जाता है। इनका चुनाव मतदाताओं द्वारा न होकर लिखित परीक्षा या मेरिट के आधार पर होता है।


पंचायत सचिव (panchayat sahayak) गांव के विकास में बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं। अतः हमें ग्राम पंचायत सहायक के कार्य (gram panchayat sahayak ke karya) और अधिकार को जानना बहुत जरूरी है। 


तो आइए, द रुरल इंडिया के इस ब्लॉग में पंचायत सहायक के कार्य (gram panchayat sahayak ke karya), सैलरी, चयन प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानें। 


पंचायत सहायक क्या होते हैं

ग्राम पंचायत सहायक (gram panchayat sahayak) ग्राम पंचायत के कार्यों को निर्वहन करने के लिए सरकारी कर्मचारी होता है। ग्राम प्रधान और सरपंचों की सहायता के लिए इनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। वर्तमान समय में पंचायत सहायक (gram panchayat sahayak) राज्य सरकार द्वारा दो तरह से भर्ती किए जा रहै हैं।


  • अस्थायी नियुक्ति- इस प्रकार के कर्मचारी कुछ समय के लिए एडहॉक पर रखे जाते हैं। ये नियुक्ति 11 महीने के लिए होती है। जो समय-समय पर बढ़ाए जाते हैं।

  • स्थायी नियुक्ति- इस प्रकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा भर्ती किए जाते हैं। यह स्थायी तौर पर नियुक्त किए जाते हैं। इनका समय-समय पर दूसरे ग्राम पंचायतों में ट्रांसफर भी किया जाता है। इन्हें सरकार द्वारा निर्धारित प्रतिमाह वेतन दिए जाते हैं। इन्हें कुछ राज्यों में ग्राम पंचायत अधिकारी भी कहा जाता है। 


ग्राम पंचायत सहायक (gram panchayat sahayak) की चयन प्रक्रिया

पंचायत सहायक की चयन प्रक्रिया भी दो तरीके से की जाती है। स्थायी पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों की नियुक्ति लिखित परीक्षा के माध्यम की जाती है। यह परीक्षा राज्य भर्ती आयोग द्वारा की जाती है। लिखित परीक्षा के बाद इनकी नियुक्ति सीधे तौर पर ग्राम पंचायत अधिकारी (पंचायत सेक्रेटरी) के रुप में की जाती है। 


यदि पंचायत सहायक की नियुक्ति अस्थायी तौर पर की जा रही है तो यह प्रक्रिया मेरिट या गांव के ही यो्ग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाती है। 


पंचायत सहायक के कार्य (gram panchayat sahayak ke karya)

  • ग्राम पंचायत के कामकाज का विवरण रखना

  • ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्तावित कामों को ब्लॉक तक पहुंचाना

  • ग्रामसभा की मीटिंग के रिकॉर्ड रखना

  • ग्रामीणों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना

  • मनारेगा में कार्य कर रहे व्यक्तियों का लेखा-जोखा रखना

  • किसी भी योजना के पात्र व्यक्तियों का लेखा-जोखा सरकार तक भेजना

  • गांव में हो रहे कार्यों को निगरानी करना और उसे सही तरीके से करवाना

  • किसी ग्रामीण के साथ दुर्घटना हो जाने पर, उसे मुवावजा दिलाने में मदद करना

  • पंचायत सहायक को पंचायत भवन में कंप्यूटर आपरेटर का काम करना

  • सरकारी योजना में ग्रामीणों का फार्म भरने में मदद करना


पंचायत सहायक की सैलरी (panchayat sahayak ki salary)

यदि आप ग्राम पंचायत अधिकारी के तौर पर नियुक्त किए गए हैं, तो आपको राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सैलरी दी जाती है। यदि आपकी नियुक्ति पंचायत सहायक (पंचायत सेक्रेटरी) के रुप में हुई है तो आपको ग्राम पंचायत द्वारा निर्धारित मानदेय जाएगा। जैसे- उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायक को सैलरी के रूप में प्रतिमाह 6 हजार रुपए मानदेय दी जाती है। जबकि ग्राम पंचायत अधिकारी को 5200-22000 और 1900 रुपए का पे-ग्रेड वेतनमान दिया जाता है। 


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