किसान कम लागत में भी अनार की खेती से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। इस लेख में अनार की खेती (anar ki kheti) को विस्तार से जानें।

Anar ki kheti : अनार की खेती

anar ki kheti: अनार का फल सेहत बनाने और धन कमाने, दोनों ही लिहाज से काफी लाभदायक है। अनार (pomegranate) में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन, एंटी-ऑक्सीडेंट और खनिज पाया जाता है। खून की कमी, कब्ज की शिकायत, त्वचा में कांति लाने और स्फूर्ति पाने के लिए अनार (pomegranate) का फल बहुत उपयोगी है। इसके छिलकों से भी आयुर्वेदिक औषधि तैयार की जाती है। हमारे देश में अनार की बागवानी महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में खूब होती है। 

अनार (Anar) एक ऐसा फल है जिसे कम पानी वाले क्षेत्र में भी आसनी से उगाया जा सकता है। किसान कम लागत में भी अनार की खेती से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। 

तो आइए, द रुरल इंडिया के इस लेख में अनार की खेती (anar ki kheti) को विस्तार से जानें। 

इस लेख में आप जानेंगे- 

  • अनार के लिए जरूरी जलवायु

  • खेती के लिए उपयोगी मिट्टी 

  • खेती का सही समय 

  • खेती की तैयारी कैसे करें 

  • अनार की उन्नत किस्में 

  • सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन 

  • रोग एवं कीट प्रबंधन कैसे करें 

  • अनार की खेती में कमाई और लागत की जानकारी

अनार (Anar) के लिए जरूरी जलवायु

वैसे तो अनार (pomegranate) का पौधा लगभग सभी जलवायु में पनपता है, किन्तु गर्म और शुष्क जलवायु इसके फूलने-फलने के लिए बहुत अच्छी रहती है। अनार के फल 35 से 37 डिग्री तापमान पर अच्छे से परिपक्व होते हैं। अनार की खेती के लिए जलवायु का महत्व इसी बात से लगाया जा सकता है कि मध्यप्रदेश या महाराष्ट्र जैसे गर्मी वाले इलाकों में अनार खूब रसीला और स्वादिष्ट होता है।  वहीं उत्तराखण्ड और हिमाचल में पैदा होने वाला अनार कम रसीला, खट्टा और शक्त बीज वाला होता है। असल में अधिक आद्रता वाले क्षेत्र में अनार का उत्पादन नहीं होता है। साथ ही आद्र जगहों पर फफूंद जैसे रोगों का प्रकोप इस पर अधिक होता है।


अनार की खेती के लिए उपयोगी मिट्टी 

वैसे तो अनार का पौधा लगभग सभी तरह की मिट्टी में विकसित हो जाता है, लेकिन रेतीली जगहों वाली दोमट मिट्टी या हल्की मिट्टी में गुणतायुक्त फल प्राप्त किये जाते हैं। अनार की खेती (anar ki kheti) के लिए 6.5 से 7.5 पीएच मान वाली क्षारीय मिट्टी ही प्रयोग में लाए, इस तरह की मिट्टी में अनार की अच्छी उपज होती है। 


अनार की बागवानी का सही समय 

सालभर में दो बार अनार के पौधे लगाए जा सकते हैं।

  1. जुलाई और अगस्त में

  2. फरवरी और मार्च में 


अनार की उन्नत किस्में 

अरक्ता 

यह भरपूर उपज देने वाली प्रजाति है। इसके फल बड़े और मीठे होते हैं। इसके आकर्षक दाने बरबस मन को मोह लेते हैं। एक पेड़ 30 से 32 किलो अनार का उत्पादन देता है। 


भगवा

इसके फल बडे़, चिकने और केसरिया रंग लिए होते हैं। इसके दाने खूब रसदार, मुलायम और मीठे होते हैं। एक पेड़ अच्छी देखभाल पर 35 से 45 किलो तक फल देता है। 


गणेश 

इसके फल मीडियम आकार के और बीज हल्के-गुलाबी होते हैं। 


मृदुला 

मीडियम साइज और चिकने छिलके वाला यह फल गहरा-लाल रंग वाला होता है। इसके दानों का रंग सुर्ख-लाल और बीज मुलायम होते हैं। 


ज्योति 

यह हल्की पीलेपन वाली प्रजाति है, जो आकार में मीडियम से कुछ बड़ी होती है। इसके दाने रस से भरे और खूब मीठे होते हैं। 


पौध की तैयारी (नर्सरी)

  1. कलम लगाकर 

एक साल पुरानी शाखाएं कलम लगाने के लिए अच्छी रहती हैं। 25 से 30 सेमी. लम्बी शाखाओं को काटकर नर्सरी में लगाया जाता है। इन कलमों को अगर इण्डोल व्यूटारिक एसिड (आई.आई.बी) 1000 पी.पी.एम. से उपचारित किया जाए तो उनपर अधिक और स्वस्थ्य जड़ें  निकलती है। 

  1. गूटी लगाकर 

गूटी द्वारा स्वस्थ पौध तैयार की जाती है। व्यवसायिक तौर पर पौध तैयार करने के लिए से इस विधि का खूब प्रचलन है। जून के अंतिम सप्ताह से लेकर अगस्त तक गूटी लगाने का सही समय है। इस दौरान एक वर्ष पुरानी अनार की ऐसी शाखा का चयन करें, जिसकी मोटाई पेंसिल जितनी हो। 


अब इस शाखा पर से कलिका यानी पत्तियों के निकलने वाले स्थान से थोड़े नीचे वाले भाग से छाल पूरी तरह से हटा दें। अब यहां पर इण्डोल व्यूटारिक एसिड (आई.आई.बी) 1000 पी.पी.एम. का लेप लगाइए। अब इस लेप को स्फेनगम नामक मॉस से लपेटें और उसके ऊपर पॉलीथीन को जूट की सूतली की सहायता से बांधिए। कुछ दिन बाद आपको पॉलीथीन के अंदर जडें दिखाई देंगी। इस टहनी के भाग को काटकर नर्सरी बेड या गमलों में रोप दें। स्वस्थ पौध तैयार है।

 

अनार की बागवानी के लिए खेत की तैयारी

  1. सामान्य बगीचे हेतु रोपण के लिए – 5x5 या 5x6 मीटर की दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं।

  2. सघन विधि से हेतु रोपण के लिए – 5x3 या 5x2 या 4.5 x 3 मीटर की दूरी पर पौधे लगाए जाते हैं। (इस तरह से क्रमशः 1000 मी./हे. या 650मी./हे. या 750 मी./हे. पौधे लगाए जा सकते हैं)


गड्ढे तैयार करना

पौध रोपण से एक महीने पहले गड्ढे की खुदाई 60 सेमी. लम्बे,  60 सेमी. चौडे और 60 सेमी. गहराई वाले गड्ढे तैयार करें। गढ्ढे की ऊपरी परत वाली मिट्टी में 20 किग्रा0 सड़ी गोबर की खाद, 1 किग्रा0 सिंगल सुपर फास्फेट व 50 ग्राम क्लोरोपायरीफास चूर्ण मिला कर गड्ढे को सतह से 15 सेमी0  ऊंचाई तक भर दें। गड्ढे भरने के बाद सिंचाई करने से मिट्टी अच्छे से जम जाती है। उसके बाद पौधों की रोपाई करें। रोपाई करने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई जरूर करें।


अनार की बागवानी में सिंचाई प्रबंधन

अनार की फसल शुष्क क्षेत्रों में अच्छी होती है। मार्च के अंत से मानसून के आगमन तक इसकी सिंचाई लगातार किया जाना जरूरी है। बरसात के मौसम के बाद प्रत्येक सप्ताह या 10 से 12 दिन के अंतराल में अनार के पेड़ों को पानी देना चाहिए। टपक या बूंद-बूंद सिंचाई अनार पौधों के लिए अच्छी रहती है। इस तरह की सिंचाई से आप 45 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत कर 25 से 35 प्रतिशत वृद्धि कर सकते हैं। 


घडे़ से टपक सिंचाई 

अनार की खेती (anar ki kheti) में घडे़ से सिंचाई करने से जहां पानी की बचत होती है। इस विधि में प्रत्येक पेड़ के नीचे एक 10 से बीस लीटर का घड़ा रखा जा सकता है। घडे़ को गले तक मिट्टी में गाढ़ा जाता है, ऐसा करने से जहां तेज गर्मी से घडे़ का पानी नहीं सूखता वहीं पौधे की जडों में निरंतर नमी बनी रहती है। प्रत्येक हफ्ते घडे़ में पानी भरना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। 


Anar ki kheti : अनार की खेती


उर्वरक प्रबंधन 

  • सबसे पहले मिट्टी का परीक्षण जरूरी है। इस परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा का निर्धारण किया जाए, इन उर्वरकों को सड़ी हुई भुरभुरी गोबर की खाद के साथ मिलायें। पौधों के चारों ओर लगभग 10 सेमी0 गहराई के थौले या केनोपी बनाकर उनमें खाद डालें। 

  • पौधों की खुराक को यूं बांटे- नाइट्रोजन और पोटाश युक्त उर्वरकों के तीन भाग करें। इस खुराक का पहला भाग सिंचाई के समय करें। दूसरा भाग 20 से 28 दिनों के बाद दें। ध्यान रखें की फास्फोरस की पूरी खुराक पहली सिंचाई के समय ही दें। 

  • यदि आपके बगीचे की मिट्टी काली हो तो उसमें नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए यूरिया और लाल मिट््टी में कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट डालें। फास्फोरस की आपूर्ति के लिए सिंगल सुपर फास्फेट एवं पोटाश की आपूर्ति के लिए म्यूरेट ऑफ पोटाश का प्रबंधन करना जरूरी है। 

  • मृदा परीक्षण के आधार पर सूक्ष्म तत्वों को देना सुनिश्चित करें। जिंक, बोरान, आइरन और मैगनीज की 20-25 ग्राम मात्रा को प्रत्येक पौधे को गोबर की सड़ी खाद के साथ मिलाकर दें। 

  • पौधों में फूल आने के समय 12:61:00 के अनुपात में नाइट्रोजनः फॉस्फोरसः पोटाश को 8 किग्रा0/हैक्टेयर के हिसाब से एक दिन के अंतराल मेंएक महीने तक दें।

  • फलन की अवस्था में 19:19:19 के अनुपात में नाइट्रोजनः फॉस्फोरसः पोटाश को ड्रिप की सहायता से एक दिन के अंतराल में एक महीने तक दें।

  • जब पेड़ फलों से पूरी तरह से लद जाएं तो आप उन्हें 00: 52: 34 के अनुपात में नाइट्रोजनः फॉस्फोरसः पोटाश की मात्रा को एक दिन के अंतराल में एक महीने तक दें। 

  • पेडों से फल तोड़ने के एक महीने पहले कैल्शियम नाइट्रेट की प्रति हेक्टेयर 12 किलोग्राम मात्रा ड्रिप की सहायता से दें। 

Anar ki kheti : अनार की खेती


अनार की फसल में रोग एवं कीट प्रबंधन 

झुलसा रोग 

इस रोग में अनार(Anar) की पत्तियों पर बेहिसाब धब्बे बन जाते हैं। इन धब्बों का रंग हल्का भूरा होता है। बाद में पत्तियां गल जाती हैं। 

क्या करें 

  • रोपाई के वक्त स्वस्थ पौध का ही चुनाव करें। 

  • पेड़ों पर कॉपर ऑक्सीक्लोराईड की 2.5 ग्राम मात्रा को/ लीटर पानी में या स्टेप्टोसाइक्लिन 0.2 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 


फल सड़न 

फफूंद फलों की दुश्मन है। इसके कारण फल और उनके डण्ठल पर काले चकते दिखते हैं, फिर ये पूरे फलको घेर देते हैं। और फल सड़ जाते हैं।

क्या करें

  • कार्बेण्डिजिम 50 डब्लू पी. के 1 ग्राम को /लीटर पानी में घोलकर एक-दो हफ्ते के अंतराल में छिड़काव करें।  

उटका रोग

इस रोग में पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। तना तथा टहनियों को तोड़ने पर अदंर का भाग हल्का-काला हो जाता है। यह सीरेटोस्ट्सि के संक्रमण के कारण होता है। 

क्या करें  

  • यदि बगीचे में कोई ऐसा पौधा दिखाई दे तो उसे उखाड़कर जला दें। इस रोगी पौधे की जड़ों के आसपास की मिट्टी को सुरक्षित बगीचे से कहीं दूर फेंक दें।  

  • इस रोग के लक्षण मिलने पर कार्बेण्डिजिम 50 मिली. की 2 ग्राम /लीटर या ट्राईडिमोर्फ 80 ई.सी की 1 मिली. मात्रा को / लीटर पानी में घोलकर पौधें के जड़ वाले भाग को अच्छी तरह से भिगा दें।

कीटों से सुरक्षा

अनार में फूल आते वक्त प्रौढ़ तितली उनपर अण्डे देती हैं। फलों के विकास के साथ तितली के अण्डे इल्लियों में बदल जाते हैं और फलों के बीजों को चट कर जाते हैं। इस तरह से फल सड़कर झड़ जाता है। 

क्या करें  

  • तितलियों के प्रकोप वाले फलों को इक्कठा करके नष्ट कर दें। खेत से खरपतवारों को निकालते रहें।  

  • ट्राइजोफास 40ई.सी. की 1 मिली. मात्रा या स्पाइनोसेड एस.पी. की 0.5 ग्राम मात्रा /लीटर पानी में घोलकर पेड़ों पर छिड़कें। पहला छिड़काव फूल आते समय और दूसरा छिड़काव फूल आने के दो हफ्ते बाद करें। 

माहू

ये कीट नई कोमल शाखाओं और फूलों के रस को चूसते हैं, जिस कारण पत्तियां सिकुड़ जाती हैं। साथ ही पत्तियों से बहने वाले रस पर एक तरह का फफूंद आक्रमण कर लेता है। इन फफूंद के चलते पत्तियां प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाती। 

क्या करें 

  • प्रोफेनाफास-50 या डायमिथोएट-30 की 2 मिली0. मात्रा/ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करें। 

तना वेधक

प्रभावित शाखाओं को काट दें और इल्लियों सहित नष्ट कर दें। जो पौधे पूरी तरह से प्रभावित हो गए हों, उन्हें जड़ से उखाड़कर नष्ट कर दें।

क्या करें  

  • तने पर कीट के प्रकोप की अवस्था में मुख्य तने के आस-पास क्लोरोपायफास 2.5 मिली./लीटर पानी या ट्राईडेमार्क 1 मिली./लीटर पानी में घोलकर छेदों में छिड़क दें। 


फलों में चटकन 

चटकन या फलों का फटना अनार में एक बड़ी समस्या है। शुष्क क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। फटे हुए फलों पर फफूंद आक्रमण कर देती है और वे सड़ जाते हैं। 

क्या करें

  • नियमित रूप से सिंचाई करना जरूरी है। बोरान 0.2 प्रतिशत का छिड़काव करें। 


अनार की खेती में लागत और कमाई 

अनार का बगीचा लगाने के लिए पौध और खाद को लेकर एक हेक्टेयर जमीन में 1 से 1.5 लाख रूपये की लागत आ जाती है। आप अपने क्षेत्र के हॉर्टिकल्चर विभाग की सहायता से ड्रिप सिंचाई और उर्वरकों की व्यवस्था करके बगीचे पर आने वाली लागत को कम कर सकते है। बाजार में लगातार बढ़ती मांग के चलते अनार किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का जरिया है। अनार के बगीचे तैयार कर इससे 18-20 साल तक अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। 

सामान्य बगीचों के अलावा अनार को सघन तौर पर भी लगाया जा सकता है। सामान्य बगीचों में अनार के पौधों को 5 मीटर या उससे ज्यादा दूरी पर लगाया जाता है, वहीं अगर आप ज्यादा कमाई की इच्छा रखते हैं तो अनार के पौधों को 2-3 मीटर की दूरी पर रोप सकते हैं, ऐसा करने से आप कम जगह में अधिक पेड़ लगा देते हैं। और सघन बगीचे से दो-गुना अधिक पैदावार प्राप्त कर अपनी आमदनी को बढ़ा देते हैं। यदि आप पहले से ही अनार उत्पादक हैं और अपने बगीचे को और विस्तार देना चाहते हैं, तो आप अपनी ही नर्सरी तैयार करें। अपनी नर्सरी से जहां आपको बगीचा तैयार करने में कम मेहनत लगेगी, कम धन व्यय होगा, वहीं आप जिस प्रजाति की पौध लगाना चाहते हैं उसे तैयार कर सकते हैं। अच्छे से देखभाल करने पर आप एक हेक्टेयर से 3 से 4 लाख रूपये प्रति सीजन मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। 



ये तो थी अनार की खेती (anar ki kheti) की बात। लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजना और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।


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