पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान का चुनाव (gram pradhan ka chunav), ग्राम प्रधान की सैलरी(gram pradhan ki salary) ग्राम प्रधान के कार्य और अधिकार

ग्राम प्रधान की सैलरी और ग्राम प्रधान के कार्य

gram pradhan work: ग्राम प्रधान (village head) शब्द तो आपने सुना ही होगा। ग्राम प्रधान हमारे देश में ग्राम पंचायत के मुखिया होते हैं। ग्राम प्रधान (gram pradhan) को हमारे देश में कई नामों से जाना जाता है। 

जैसे- 

  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा में सरपंच (Sarpanch)

  • बिहार, झारखंड में मुखिया (mukhiya)

  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ग्राम प्रधान (Gram Pradhan) 

  • दक्षिण भारत में पंचायत प्रमुख या विलेज हेड (Village Head) कहा जाता है। 


आज इस लेख में हम आपको पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान का चुनाव (gram pradhan ka chunav), सैलरी (gram pradhan ki salary), कार्य (gram pradhan ke karya) और अधिकार के बारे आसान भाषा में जानकारी देंगे। 


तो आइए, सबसे पहले भारत में पंचायती राज व्यवस्था (Panchayati Raj System)  को जान लेते हैं। 


पंचायती राज व्यवस्था-1992 (panchayati raj act 1992)

हमारे देश में आजादी के बाद से ही लोकतंत्रिक व्यवस्था है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था नहीं थी। निचले स्तर पर लोगों को पंचायत स्तर पर अधिकार मिले, इसके लिए संविधान में कई संशोधन होते रहे। 1992 में संविधान के 73 वें संशोधन के फलस्वरूप स्थानीय स्वशासन की मान्यता मिली। इसके बाद 24 अप्रैल 1993 से पूरे भारत में पंचायती राज व्यवस्था का प्रावधान है। जिसे आज हम लोग गांव की सरकार के नाम से भी जानते हैं। 


इस संविधान संधोधन में पंचायती राज व्यवस्था को 3 स्तरों पर विभाजित किया गया है। 

  1. गांव स्तर पर ग्राम पंचायत

  2. ब्लॉक या खंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत (क्षेत्र समिति)

  3. जिला स्तर पर जिला परिषद (जिला पंचायत)


इन सभी में गांव स्तर पर ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम आपको ग्राम पंचायत और ग्राम प्रधान की चर्चा करेंगे।


ग्राम पंचायत क्या है (gram panchayat kya hai)

ग्राम पंचायत देश में सबसे निचले स्तर की लोकतांत्रिक इकाई है। इसके जनप्रतिनिधियों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्येक 5 साल में किया जाता है। ग्राम पंचायत के अंतर्गत  ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्य का चुनाव किया जाता है। ग्राम प्रधान ही ग्राम पंचायत के मुखिया (Mukhiya) होते हैं। ग्राम प्रधानों के द्वारा ही गांव में विकास कार्यों को क्रियान्वित किया जाता है। 

 

ग्राम प्रधान पद की महत्ता (Importance of village head post)

ग्रामीण स्तर पर ग्राम प्रधान सबसे अधिक चर्चित और महत्वपूर्ण पद है। ग्राम प्रधान को गांव का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है। ग्राम प्रधान पद की महत्ता हमारे देश में प्राचीन काल से है। वैदिक काल में भी गांव में ग्राम प्रधान होते थे, जिसे ग्रामणी, ग्रामिक जैसे नामों से जाना जाता था। गांव के विकास कार्यों से लेकर गांव का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की होती है। 


ग्राम प्रधान का चुनाव (gram pradhan ka chunav)

पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम प्रधान का चुनाव सीधे ग्रामवासियों द्वारा किया जाता है। 18 वर्ष के अधिक उम्र के नागरिक पंचायती चुनाव में मतदान करते हैं। ग्राम प्रधान का चुनाव प्रत्येक 5 वर्ष में संपन्न कराया जाता है। ग्राम प्रधान के चुनाव में जिस उम्मीद्वार को सबसे ज्यादा वोट मिलता है। उसे राज्य निर्वाचन आयोग ग्राम प्रधान (Village Head) घोषित कर देती है। 


ग्राम प्रधान के कार्य (gram pradhan ke karya)

  • गांव में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कराना

  • गरीब जनता के लिए के लिए सरकार को प्रस्ताव देना

  • गांव में विकास कार्यों को करना

  • गांव के योग्य लाभार्थियों की पहचान करना

  • शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं ग्रामवासियों को उपलब्ध कराना

  • गांव में उर्जा, सड़क और ग्राम विकास से जुड़े सभी मुद्दों पर कार्य करना

  • गरीब परिवार और बुजर्गो के लिए पेंशन और अन्य सुविधा का लाभ देना

  • राशन या सार्वजानिक वितरण प्रणाली द्वारा सस्ते मूल्य पर खाद्य का लाभ देना|

  • ग्राम सभा की नियमित बैठक बुलाना

इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर कई कार्य हैं जिसकी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है। 


ग्राम प्रधान की सैलरी (gram pradhan ki salary)

समय-समय पर ग्राम प्रधानों द्वारा लोकसभा सांसद, विधायकों जैसी सैलरी और सुविधाओं की मांग की जाती रही है। लेकिन अभी तक ग्राम प्रधान की सैलरी नहीं मिलती है। किसी-किसी राज्यों में ग्राम प्रधान की सैलरी के तौर कुछ मानदेय देने का प्रावधान है। जैसे- उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान को 5,000 रुपए मानदेय मिलता है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश में सरपंच की सैलरी मानदेय के रूप में 3000 रूपए मिलती है। 


ग्राम प्रधान को हटाने की प्रक्रिया (gram pradhan ki sikayat kaise kare)

यदि आपके गांव का प्रधान सही से काम नहीं कर रहा है या गांव के काम में भ्रष्टाचार में लिप्त है तो आप इसकी शिकायत विकास खंड एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को कर सकते हैं।

इसके लिए आपको ग्राम पंचायत के 2/3 तिहाई सदस्यों का बहुमत होना आवश्यक है। यदि ग्राम प्रधान पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो जाते हैं या ग्राम पंचायत के 2/3 सदस्य अविश्वास पारित कर देते हैं तो जिला पंचायत राज अधिकारी उस ग्राम प्रधान को हटाकर फिर से चुनाव करा सकता है।


आशा है, इस लेख में आपको ग्राम प्रधान का महत्व और ग्राम प्रधान के कार्य (gram pradhan ke karya), ग्राम प्रधान की सैलरी (gram pradhan ki salary) और ग्राम प्रधान को हटाने की प्रक्रिया (gram pradhan ki sikayat kaise kare) के बारे में पूरी जानकारी मिली होगी।


यदि आप कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर पढ़ना चाहते हैं, तो ‘द रुरल इंडिया’ के इन ब्लॉग्स को जरूर पढ़ें। 


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4 comments:

  1. Hamare gaon ka Pradhan sukai aur Harishchandra se bika hua hai sare gaon ko ullu banaa raha hai aur gram samaj ki jameen ko bech raha hai kripya prashasan se hamari gujarish hai ki jald sales mein kaarvayi karne ki kripa Karen

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  2. इसमें प्रधान की सैलरी कम बताई गई है

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अपडेट हो गया है, नई व्यवस्था के अनुसार उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रतिमाह 5 हजार रुपए मिलते हैं।
      धन्यवाद!

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