रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) किसानों को अधिक लाभ दिलाती है। रजनीगंधा फूल की मांग बाजार में खूब रहती है। (rajnigandha ki kheti kaise kare?)

रजनीगंधा की खेती कैसे करें? यहां जानें

rajnigandha ki kheti: हमारे जीवन में फूलों का एक खास महत्व है। फूलों को प्यार, स्नेह और आस्था का प्रतीक माना जाता है। फूल हमारे जीवन में सुख शांति और प्यार लेकर आता है तभी तो लोग इन फूलों का प्रयोग प्यार का इजहार करने के लिए करते हैं। 


वैसे हरेक फूल की अपनी एक खास पहचान होती हैं। इन्हीं फूलों में से रजनीगंधा (Rajnigandha) का भी फूल है। व्यापारिक दृष्टि से भी यह फूल बहुत उपयोगी है। क्योंकि यह फूल कई दिनों तक ताजा रह सकता है। रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) किसानों को अधिक लाभ दिलाती है। रजनीगंधा फूल की मांग बाजार में खूब रहती है। 


ऐसे में रजनीगंधा की खेती का बिजनेस (Rajanigandha Farming Business in Hindi) से आप अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। रजनीगंधा अपनी सुगंध के कारण काफी लोकप्रिय है। बाजार में इस फूल की मांग भी अधिक है। इस फूल का उपयोग गुलदस्ता, माला, महिलाओं के बालों में लगाने के लिए और शादी-विवाह की सजावट के लिए इस फूल का बेहद इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा रजनीगंधा फूल का उपयोग सुगंधित तेल बनाने के लिए भी किया जाता है।


तो आइए, द रूरल इंडिया के इस लेख में रजनीगंधा की खेती कैसे करें, (rajnigandha ki kheti kaise kare?) विस्तार से जानें।


इस लेख में आप जानेंगे

  • रजनीगंधा खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

  • रजनीगंधा खेत के लिए भूमि का चुनाव

  • रजनीगंधा फूल की किस्में

  • खेत की तैयारी

  • कंद की रोपाई

  • खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

  • रजनीगंधा की खेत में सिंचाई प्रबंधन

  • रजनीगंधा फूल में लगने वाले रोग

  • रजनीगंधा फूलों की कटाई

  • रजनीगंधा की खेती में लागत और कमाई


सबसे पहले जानते हैं, रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) के लिए उपयुक्त जलवायु के बारे में...


रजनीगंधा की खेती (tuberose cultivation) के लिए उपयुक्त जलवायु

रजनीगंधा शीतोष्ण जलवायु का पौधा है। लेकिन औसत जलवायु में इसकी खेती को आप सालभर आसानी से कर सकते है। भारत में समशीतोष्ण जलवायु में गर्म और आर्द्र जगहों पर इस फूल का अच्छा विकास होता है। इसके अलावा रजनीगंधा के विकास और वृद्धि के लिए मौसम का तापमान 20 से 35 सेंटीग्रेड उपयुक्त माना जाता है।


आपको बता दें, रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अधिक होती है। भारत के मैदानी भागों में इसकी खेती सितंबर के महीने में ही शुरू हो जाती है और वहीं पहाड़ी भागों में जून के महीने में इसकी खेती की जाती है। 


रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) के लिए भूमि का चुनाव

रजनीगंधा फूल की खेती के लिए खुली हवादार और ज्यादा प्रकाश वाली जगह उपयुक्त होती है। लेकिन गर्मी के महीनों में ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां पर धूप और छाया दोनों का मिश्रण खेत को प्राप्त हो सके। रजनीगंधा की खेती के लिए ऐसी जगह को नहीं चुने जहां पर पानी ठहरता हो। क्योंकि इसकी खेती के लिए अधिक मात्रा में पानी की जरूरत नहीं होती है।


रजनीगंधा के लिए दोमट और बलुई मिट्टी को बढ़िया माना जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि इस मिट्टी का ph मान 6.5 से 7.5 के बीच ही हो। इस पीएचमान में रजनीगंधा की फूलों का विकास बेहतर होता है।


रजनीगंधा फूल की किस्में

रजनीगंधा फूल की किस्मों को चार प्रमुख वर्ग में बांटा गया हैं।


1. एकहरा- इस किस्म के फूल सफेद रंग के होते है। इनकी पंखुड़िया की एक ही पंक्ति होती है।

एकहरा किस्म में और भी किस्म के फूल पाए जाते है। जैसे- श्रृंगार, प्रज्जवल, लोकल।


2. डबल- इस किस्म के फूल भी सफेद रंग के होते है।

इस फूल का ऊपरी सिरा गुलाब के रंग का होता है। इसमें पंखुड़ियां कई पंक्ति में होती है, जिससे इस फूल का केंद्र बिंदु नहीं दिखाई देता है।

डबल किस्म के फूलों में भी कई किस्में और देखने को मिलती है। इनमें सुवासिनी, वैभव, प्रमुख किस्में हैं।


3. अर्थ डबल-  इस किस्म के फूलों में पंखुड़िया की संख्या दो या तीन पंक्तियों की होती हैं।

अर्थ डबल किस्म के फूलों में कुछ किस्म और मिलते है। जैसे- कलकत्ता सिंगल, कलकत्ता डबल, मैक्सिकन सिंगल आदि।


4. धारीदार- धारीदार किस्म के फूल डबल व सिंगल दोनों तरह के होते हैं। इस फूल का पत्तियों का किनार सुनहरा और सफेद होता है, जो इस फूल की सुंदरता को और बढ़ा देता है।

धारीदार फूलों की किस्में- स्वर्ण रेखा, रजत रेखा।


खेत की तैयारी

  • रजनीगंधा फूल की खेती करने के लिए सबसे पहले अपने खेती की मिट्टी को समतल बनाएं।

  • उसके बाद खेत में अच्छे से जुताई करें। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा जरूर लगाए। ताकि खेत की मिट्टी अच्छे से भुरभुरी बन जाएं।

  • अंतिम जुताई करते वक्त खेत में उचित मात्रा में कम्पोस्ट खाद मिलाएं।

  • उसके बाद खेत में क्यारी बनाएं।

 

आपको बात दें, रजनीगंधा फूल एक कंद वाली फसल है। इस फूल के अच्छे विकास के लिए जरूरी है कि आपका खेत सही ढंग से तैयार हो।


कंद(कलम) की रोपाई

रजनीगंधा के पौधे कलम(कंद) द्वारा लगाई जाती है। कंद की रोपाई के लिए मार्च-अप्रैल का महीना उपयुक्त होता है। इसकी रोपाई के लिए 30 से 60 ग्राम और 2 सेंटीमीटर व्यास वाले कंद का चुनाव करना चाहिए।


कंदों पर ब्लाइट्रॉस दवा का प्रयोग करके रोपाई करनी चाहिए। ध्यान रहे कि सिंगल किस्म के कंदों को लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी और साथ ही लाइन से लाइन की दूरी 20 से 30 सेंटीमीटर पर लगाएं। डबल किस्म के कंदों को लगभग 20 सेंटीमीटर की दूरी और 5 सेंटीमीटर की गहराई पर लगाएं।


खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

रजनीगंधा फूल की खेती (rajnigandha ki kheti) की अच्छी उपज के लिए प्रति हेक्टेयर में लगभग 300-400 क्विंटल गोबर की खाद, 200 किलोग्राम नाइट्रोजन और 200 किलोग्राम फॉस्फोरस व पोटाश की मात्रा डालें। लेकिन यह सब खेत में रोपाई के 3-4 दिन पहले ही डालनी चाहिए। खेत में नाइट्रोजन उचित मात्रा में कम से कम 3 बार देना चाहिए। एक रोपाई से पहले, दूसरा रोपाई से 60 दिन बाद और तीसरा जब पौधों में फूल आना शुरू हो जाएं तब देना चाहिए।


रजनीगंधा की खेती में सिंचाई प्रबंधन

रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) में सिंचाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। क्योंकि इसमें समय-समय पर सिंचाई देने बेहद जरूरी है।गर्मी के मौसम में आप 7 से 8 दिनों के अंतराल पर सिंचाई कर सकते है। सर्दी और बारिश के मौसम में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर खेती की सिंचाई कर सकते है।


रजनीगंधा फूल में लगने वाले रोग और उसका प्रबंधन

इस फसल की मुख्य खासियत यह है कि इसमें किसी भी तरह का कोई खतरनाक रोग नहीं लगता है। लेकिन खेत में पानी की अधिक मात्रा के होने से इसमें फफूंद रोग लग जाता है। इसके बचाव के लिए ब्रैसीकाल दवा का छिड़काव करें। इसके पौधों पर कभी-कभी बोट्रिटिस स्पॉट और ब्लाइट का प्रकोप हो जाता है, जो पौधों की पत्तियों पर हानि पहुंचाता है।


रजनीगंधा फूलों की कटाई

इसके पौधों पर लगभग 4 से 5 महीनों के अंतराल पर फूल आना शुरू हो जाते है। अगर आप इसके फूल को माला और गजरा बनाने के लिए तोड़ना चाहते है, तो आप इसे सुबह के समय तोड़। अगर आप इसके फूलों को दूर बाजार या अन्य स्थान पर भेजते हैं, तो आप इसके सबसे नीचे के फूलों को खिलने से पहले ही काट लें। 

स्पाइन की लंबाई अधिक होने पर बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। इसलिए जमीन के नजदीक वाले फूलों को डंठल के साथ काटें। कांटे के बाद पानी की भरी बाल्टी में इसे डाल दें।


रजनीगंधा की खेती (rajnigandha ki kheti) में लागत और कमाई

रजनीगंधा की खेती आप पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस में करते हैं, तो यह लागत अधिक आएगी। लेकिन इससे आपको मुनाफा भी दो से चार गुना होगा। सामान्य खेत में एक हेक्टेयर में रजनीगंधी की खेती (tuberose cultivation) करने में 1-2 लाख का खर्च आता है। इसकी खेती से पहले साल में प्रति हेक्टेयर लगभग 90 से 100 क्विंटल फूल प्राप्त होते हैं। इससे आप प्रतिवर्ष 4-5 लाख रुपए आराम से कमा सकते हैं। 


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