panchayati raj system in india: पंचायती राज क्या है? यहां जानें, पंचायत के कार्य, सरपंच के कार्य और अधिकार, ग्राम पंचायत क्या है, gram panchayat

panchayati raj system in india in hindi: भारत में पंचायती राज व्यवस्था का अस्तित्व प्राचीन काल से ही रहा है। आधुनिक भारत में पंचायती राज व्यवस्था अर्थात स्थानीय स्वशासन (local self governance) की शुरूआत देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्तूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव में की थी।

पंचायती राज व्यवस्था का जिक्र हमें मनुस्मृति, महाभारत जैसे ग्रंन्थों में भी मिलता है। प्राचीन भारत में गांव के स्वशासन (self-government) के मुखिया को ग्रामणी, ग्रामधिपति, रेड्डी और पंचमंडली से जाना जाता था। 


पंचायत का अर्थ एवं महत्व (importance of Panchayat)

पंचायत शब्द संस्कृत के शब्द 'पंचेन' और 'आयतनम्' से मिलकर बना है। 'पंचेन' शब्द का अर्थ है पांच सदस्य। आपको बता दें, स्थानीय स्तर पर होने वाले विवादों का निपटारा के लिए लोगों के समूह को 'पंच' कहा जाता है। जबकि आयतनम् का मतलब स्थान या कार्यालय होता है। जहाँ पंच इकट्ठे होकर गांव के मुद्दों पर विचार-विमर्श और निर्णय निर्णय कर सकें। 

प्राचीन भारत की यह व्यवस्था आधुनिक भारत में भी जारी है। एक विशाल लोकतंत्र होने के कारण विकास और न्याय को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए पंचायती राज को वर्तमान में भी बरकरार रखा गया है। 

आपको बता दें, स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1957 में योजना आयोग (अब नीति आयोग) ने ‘सामुदायिक विकास कार्यक्रम’ और ‘राष्ट्रीय विस्तार सेवा कार्यक्रम’ के अध्ययन के लिये ‘बलवंत राय मेहता समिति’ का गठन किया। नवंबर 1957 में समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस समिति ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद लागू करने का सुझाव दिया। 

वर्ष 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद ने बलवंत राय मेहता समिति की सिफ़ारिशें स्वीकार करते हुए 2 अक्तूबर, 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में देश की पहली त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की शुरूआत की। वर्ष 1993 में 73वें संविधान संशोधन से भारत में पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्ज़ा प्राप्त हुआ। 


panchayati raj system in india: पंचायती राज क्या है? यहां जानें


आइए सबसे पहले जानते हैं ग्राम पंचायत क्या है?(gram panchayat kya hai)

ग्राम पंचायत (gram panchayat)

पंचायती राज का सबसे निचला स्तर ग्राम पंचायत है। ग्राम पंचायत की न्यायपालिका को ग्राम कचहरी कहते हैं जिसका प्रधान सरपंच होता है। सरपंच का प्रमुख कार्य ग्राम कचहरी का अध्यक्षता करना है। 

ग्राम पंचायत के अंतर्गत मुखिया का स्थान महत्त्वपूर्ण है। पंचायत के सभी कार्यों की देखभाल मुखिया ही करता है। मुखिया अपनी कार्यकारिणी समिति की सलाह से ग्राम पंचायत के अन्य कार्य भी कर सकता है। ग्राम पंचायत में न्याय तथा शान्ति की व्यवस्था करने का उत्तरदायित्व मुखिया का होता है। 

प्रत्येक ग्राम पंचायत का एक कार्यालय होता है, जो एक पंचायत सेवक के अधीन होता है। पंचायत सेवक की नियुक्ति राज्य सरकार करती है। इसलिए उसे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वेतन भी मिलता है। ग्राम पंचायत के सचिव के रूप में कार्य करने के कारण उसे ग्राम पंचायत के सभी कार्यों के निरीक्षण का अधिकार है। वह मुखिया, सरपंच तथा ग्राम पंचायत को कार्य संचालन में सहायता करता है। 


ग्राम पंचायत के कार्य (gram panchayat ke karya)

  • पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजनाएँ तैयार करना

  • वार्षिक बजट तैयार करना

  • प्राकृतिक आपदा में सहायता-कार्य पूरा करना

  • लोक सम्पत्ति से अतिक्रमण हटाना

  • कृषि और बागवानी का विकास और उन्नति

  • बंजर भूमि का विकास

  • पशुपालन, डेयरी उद्योग और मुर्गीपालन

  • चारागाह का विकास

  • गाँवों में मत्स्यपालन का विकास

  • सड़कों  के किनारे और सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण

  • ग्रामीण, खादी एवं कुटीर उद्योगों का विकास

  • ग्रामीण गृह-निर्माण, सड़क, नाली, पुलिया का निर्माण एवं संरक्षण

  • पेय जल की व्यवस्था

  • ग्रामीण बिजलीकरण एवं गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत की व्यवस्था एवं संरक्षण

  • प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों सहित शिक्षा, व्यस्क एवं अनौपचारिक शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि की व्यवस्था करना

  • ग्रामीण स्वस्थता, लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण कार्यक्रम, महिला एवं बाल विकास, विकलांग एवं मानसिक रूप से मंदबुद्धि व्यक्तियों, कमज़ोर वर्ग ख़ासकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कल्याण-सबंधी कार्यक्रमों को पूरा करना

  • जन-वितरण प्रणाली की उचित व्यवस्था करना

  • धर्मशालाओं, छात्रवासों, खटालों, कसाईखानों, सार्वजनिक पार्क, खेलकूद के मैदान, झोपड़ियों का निर्माण एवं व्यवस्था करना


आइए अब जानते हैं पंचायत समिति क्या है?

पंचायत समिति क्या है? (panchayat samiti kya hoti hai)

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में प्रखंड(ब्लॉक) स्तर पर गठित निकाय पंचायत समिति कहलाती है। प्रत्येक प्रखंड में एक पंचायत समिति की स्थापना होती है जिसका नाम उसी प्रखंड के नाम पर होता है। इसे कई राज्यों में जनपद पंचायत और क्षेत्र पंचायत भी कहते हैं। राज्य सरकार को पंचायत समिति के क्षेत्र को घटाने-बढ़ाने का अधिकार होता है।

प्रखंड की प्रत्येक पंचायत के सदस्यों द्वारा निर्वाचित होते हैं। जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए स्थान अरक्षित रहते हैं। आरक्षित पदों में भी 30 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए अरक्षित है। इनमें एक महिला के लिए आरक्षित रहता है। अनारक्षित पदों में भी 50% स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है।

प्रत्येक ग्राम पंचायत का मुखिया पंचायत समिति का सदस्य होता है। प्रखंड के अंतर्गत चुनाव क्षेत्रों द्वारा निर्वाचित राज्य विधान सभा और संघीय लोक सभा के सभी सदस्य इसके सदस्य होते हैं।

उस प्रखंड के निवासी जो विधान परिषद और संघीय राज्य सभा के सदस्य हैं, भी इसके सदस्य होते हैं।


पंचायत समिति के प्रमुख कार्य (panchayat samiti ke karya kya hai) 

पंचायत समिति को अपने क्षेत्र के अंतर्गत सभी विकास-कार्यों के सम्पादन का अधिकार दिया गया है। ग्राम पंचायतों, सहकारी समितियों आदि की मदद से पंचायत समिति ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए कोई भी आवश्यक कार्य कर सकती है। 

जैसे-

  • शिक्षा-सम्बन्धी कार्य

  • स्वास्थ्य-सम्बन्धी कार्य

  • कृषि-सम्बन्धी कार्य

  • ग्रामोद्योग-सम्बन्धी कार्य

  • आपातकालीन कार्य


आइए अब जानते हैं जिला स्तर पर जिला पंचायत क्या है?

जिला परिषद (zila parishad)

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में जिला परिषद सबसे ऊपरी संस्था है। इसे कई राज्यों में जिला पंचायत के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक जिले में एक जिला परिषद होती है। इसके सदस्यों का चुनाव भी सीधे ग्रामीण जनता द्वारा की जाती है। 

जिला परिषद के आरक्षित स्थानों में 1/3 भाग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसके अतिरिक्त पंचायत समिति में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जानेवाले स्थानों की कुल संख्या के 50 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित होता है। 


जिला परिषद का कार्य(zila parishad ke karya kya hai)

जिला परिषद के अंतर्गत कृषि-सबंधी, पशुपालन-सबंधी, उद्योग-धंधे-सबंधी, स्वास्थ्य-सम्बन्धी, शिक्षा-सम्बन्धी, सामजिक कल्याण एवं सुधार सम्बन्धी, आवास-सम्बन्धी कार्यों के अलावा ग्रामीण बिजलीकरण, वृक्षारोपण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, ग्रामीण हाटों और बाज़ारों का अधिग्रहण, वार्षिक बजट बनाना इत्यादि के काम होते हैं।


पंचायती राज का महत्व (importance of panchayati raj in hindi)

केंद्र या राज्यों की योजनाओं को सफल करने में पंचायती राज काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्राम पंचायतें अपनी विभिन्न समितियों के माध्यम से गाँव में विकास कार्यों को संचालित करती हैं। और इसके लिए उन्हें किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती है। गाँव में स्वच्छ पेयजल और खेतों के लिये पानी का प्रबंधन जैसे चुनौतीपूर्ण काम भी पंचायत काफ़ी बेहतरीन तरीके से करती है जिससे काम काफ़ी आसानी से और तेज़ी से होता है। इसके अलावा पंचायत स्तर पर स्थापित ग्राम न्यायालय से गरीब ग्रामीणों को कम खर्च में शीघ्र न्याय मिलने में मदद मिलती है। 

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संक्षेप में कहें तो त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत गाँवों का विकास तो हुआ है लेकिन अभी भी मीलों लंबा सफ़र तय करना बाक़ी है। इस सफ़र में तेज़ी लाने के लिए निटर सरकार की योजनाओं को गाँवों तक पहुंचाने तथा उसे अमल में लाने के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठाने में पंचायतों को मदद कर रहा है। साथ ही योजनाओं की जानकारी और इस संबंध में उचित शिक्षा के माध्यम से ग्रामीणों को सशक्त करने की पहल कर रहा है।

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