Artificial Insemination: कृत्रिम गर्भाधान क्या है? जानिए कृत्रिम गर्भाधान के फायदे और सही तरीका, कृत्रिम गर्भाधान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
Artificial Insemination: कृत्रिम गर्भाधान क्या है? जानिए कृत्रिम गर्भाधान के फायदे और सही तरीका

Artificial insemination procedure in cows and buffalo: देश में डेयरी उद्योग और पशुपालन तेजी से फल फूल रहा है। देश में कुल पशुधन आबादी 535.78 मिलियन है। पशुपालन में किसानों को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। इसमें पशुओं का सही समय पर गर्भाधान का नहीं होना और बांझपन की समस्या आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब पशु हीट पर होता है, तो पशुपालकों को बैल या सांड नहीं मिलता।


जिसके चलते पशुपालक समय पर दूध का काम शुरू नहीं कर पाते और उन्हें आर्थिक रूप से काफी नुकसान होता है। 


इसलिए आज हम द रूरल इंडिया के इस लेख में पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) से जुड़ी हुई जानकारी दे रहे हैं। 


कृत्रिम गर्भाधान एक ऐसा अनोखा तरीका है। जिसके जरिए बिना नर पशु के मादा पशु को गाभिन किया जा सकता है। 


तो आइए जानते हैं कृत्रिम गर्भाधान क्या है? जानिए कृत्रिम गर्भाधान के फायदे और सही तरीका।


कृत्रिम गर्भाधान क्या है? (What is artificial insemination?)

कृत्रिम गर्भाधान आज के समय में पशु को सबसे जल्दी गाभिन करने का तरीका है। इस प्रकार के गर्भाधान में बैल या सांड का वीर्य लेकर मादा पशु के शरीर में संचित(निषेश्चित) कर दिया जाता है। इसके जरिए पशु आसानी से गर्भ धारण कर लेता है। इस प्रक्रिया के दौरान नर और मादा पशु का आपस में संभोग करना जरूरी नहीं होता। इसी प्रक्रिया को कृत्रिम गर्भाधान कहा जाता है। आपको बता दें, वीर्य तरल नाइट्रोजन में कई सालों तक सुरक्षित रहता है।


कृत्रिम गर्भाधान के फायदे (benefits of artificial insemination)

वह किसान और पशुपालक जो अपनी मासिक आय को बढ़ाना चाहते हैं या फिर अपने पशु के दूध की उत्पादन क्षमता को बेहतर करना चाहते हैं। उनके लिए कृत्रिम गर्भाधान (artificial insemination) काफी फायदेमंद होता है। 


कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के जरिए पशुपालक किसी विदेशी सांड का वीर्य भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जिससे दूध उत्पादन क्षमता बेहतर होती है। 


इस तकनीक के जरिए एक साल में हजारो पशुओं को गाभिन किया जा सकता है। 


कृत्रिम गर्भाधान अमूमन 100 से 150 रुपए में हो जाती है। जबकि बैल या सांड के रखने पर अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है।


कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया बेहद सुरक्षित होती है और इसे करने में भी कम ही समय लगता है। जबकि बैल या सांड के जरिए गर्भाधान कराने के समय अधिक वक्त की लग जाता है।


कृत्रिम गर्भाधान का तरीका (artificial insemination method)

कृत्रिम गर्भाधान के लिए भले ही पशु की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन इसमें कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है। इसके अलावा एक पशु चिकित्सक और टेक्नीशियन की जरूरत पड़ती है। इसके साथ ही कुछ उपकरणों की भी आवश्यकता पड़ती है। यही नहीं पशु की साफ सफाई भी ठीक से होनी जरूरी है। अगर इन बातों का ध्यान न रखा जाए तो पशु गाभिन नहीं हो पाता।   


कृत्रिम गर्भाधान से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें (Important facts about artificial insemination)

  • कृत्रिम गर्भाधान के दौरान ध्यान रखें कि मादा पशु ऋतु चक्र में हो। 

  • पशु चिकित्सक गर्भाधान से पहले गन की सफाई अच्छी तरह से करें। 

  • गन को सही जगह रखें और वीर्य को अंदर छोड़ दे। 

  • गर्भाधान के लिए कम से कम 10 से 12 मिलियन तक शुक्राणु आवश्यक होते हैं। 


ये तो थी, कृत्रिम गर्भाधान क्या है? कृत्रिम गर्भाधान के फायदे और सही तरीका (artificial insemination)। यदि आप इसी तरह कृषि, मशीनीकरण, सरकारी योजना, बिजनेस आइडिया और ग्रामीण विकास की जानकारी चाहते हैं तो अन्य लेख जरूर पढ़ें और दूसरों के लिए भी फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर करें।


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